जिम्बाब्वे में 37 साल के शासन के बाद पहली बार चुनाव, आज मतदान संपन्न

पर्यवेक्षकों ने चुनाव में संभावित त्रुटियों को लेकर चेतावनी दी है।

हरारे। जिम्बाब्वे में हो रहे चुनावों में कोई भी जीते अर्थव्यवस्ता को पटरी पर लाना उसकी बड़ी चुनौती होगी. देश के कारोबारियों को इस चुनाव से बड़ी उम्मीदें हैं.

जिम्बाब्वे में 37 साल के शासन के बाद राबर्ट मुगाबे को राष्ट्रपति पद से हटाने के बाद पहली बार हुए चुनाव के लिए आज मतदान संपन्न हो गया। हालांकि, पर्यवेक्षकों ने चुनाव में संभावित त्रुटियों को लेकर चेतावनी दी है।

दक्षिण अफ्रीकी देश में हुए ऐतिहासिक चुनाव में कभी जेडएएनयू-पीएफ पार्टी में मुगाबे के सहयोगी रहे राष्ट्रपति एमर्सन नन्गाग्वा और एमडीसी पार्टी के नेल्सन चमीसा के बीच सीधा मुकाबला है। देशभर में सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं।

चुनाव अधिकारियों के अनुसार इससे संकेत मिलता है कि देशभर में मतदान प्रतिशत अच्छा खासा रहा। यूरोपीय यूनियन के चुनाव पर्यवेक्षक भी इस बार मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया लेकिन उन्होंने संभावित त्रुटियों को लेकर चेताया।

ईयू के प्रमुख पर्यवेक्षक ई ब्रोक ने एएफपी से कहा कि कुलमिलाकर अच्छा मतदान हुआ है। खासतौर पर युवा ओं ने मतदान में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। मतदान कुल मिला कर शांतिपूर्ण रहा , जो सकारात्मक संकेत है। इन चुनाव के नतीजे चार अगस्त को घोषित होंगे।

लगभग 30 साल तक देश के राष्ट्रपति रह चुके 94 वर्षीय मुगाबे ने पत्नी ग्रेस के साथ हरारे के एक चुनाव केंद्र पर मतदान किया। उन्हें पिछले साल नवंबर में सेना ने अपदस्थ किया था। मुगाबे ने एक दिन पहले मतदाताओं से जेडएएनयू-पीएफ को खारिज करने की अपील कर सभी को चौंका दिया था।

Back to top button