छत्तीसगढ़

कुम्हारों ने किया पीओपी के मूर्तियों पर रोक लगाने की मांग

-भरत सिंह

बिलासपुर।

प्रशासन द्वारा पीओपी की मूर्ति पर रोक लगाने के बावजूद प्लास्टिक आॅफ पेरिस की मूर्तियां बड़ी तादाद में बन रही हैं। पीओपी की मूर्ति पर्यावरण के लिए खतरनाक होती है। गणेश उत्सव पास आते ही शहर में गणेश की मूर्तिया बनाई जा रही हैं, लेकिन पीओपी की मूर्तियों के आगे मिटटी के मूर्ति की पूछ कम होती है।

जिस कारण मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले कुम्हारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। त्यौहारों का सीजन आने के पहले आज कलेक्टरोरेट पहुंची महिलाओं ने जन.दर्शन में मांग की कि या तो पीओपी की मूर्तियों पर प्रभावी रोक लगाई जाए अथवा उनके लिए दूसरे रोजगार की व्यवस्था की जाए।

कुम्हार समाज द्वारा मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती है जो पानी में घुल जाती हैं, जबकि पीओपी मूर्तियां घुलती नहीं और पानी को प्रदूषित करती हैं। इसलिए कोर्ट और सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। अब ये चालाक पीओपी विक्रेता पीओपी मूर्तियों के ऊपर मिट्टी की लेप लगाकर बेचने लगे हैं।

ज्ञापन में बताया गया है कि तोरवा मे कुम्हारों का करीब 500 परिवार हैए जो मिट्टी की मूर्ति बनाने का काम करता है। इनको मिट्टी का सामान बनाने के लिए सरकार ने उपकरण भी दे रखा हैए पर पीओपी मूर्तियों के कारण उनके पास काम नहीं है। बिलासपुर शहर में उनके पास न तो स्थायी दुकान है न बैठने के लिए कोई स्थायी बाजार दिया गया है।

प्रजापति समाज ने मांग की है कि बाहरी व्यक्तियों द्वारा लाकर बेची जा रही पीओपी मूर्तियों पर तत्काल पाबंदी लगाई जाए ताकि स्थानीय कुम्हार जो पर्यावरण का ध्यान रखते हुए मिट्टी की मूर्तियां और दीये बना रहे हैं वे अपने परिवार का ठीक तरह से पालन-पोषण कर सकें।

– शासन की योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ

रेवती बाई बताती हैं कि उन लोगों को शासन की योजनाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा हे। मिटटी का बर्तन बनाना उनका पुश्तैनी काम हैं ऐसे में उनके पास इसके अलावा कोई और काम करने का विकल्प ही नही है। शासन को हमारे जीणोद्धार के लिए घ्यान देना चाहिए।

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