सहकारिता में प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की ताकत : रमन

रायपुर : सहकारिता क्षेत्र में प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की ताकत है। सहकारिता के माध्यम से कुटीर और छोटे-छोटे व्यवसाय शुरु कर लाखों लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। उक्त बातें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कही। शनिवार दोपहर वे इंडोर स्टेडियम में नव-निर्वाचित सहकारी पदाधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सह सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने सहकारिता ध्वज फहराकर सम्मेलन की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलकर काम करना ही सहकारिता की पहचान है। किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था का संचालन सफलतापूर्वक प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। किसानों से लगभग 70 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की जाती है और उन्हें लगभग 10 हजार 800 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है। हिन्दुस्तान में किसी भी राज्य में ऐसी व्यवस्था नहीं है। सहकारिता प्रतिनिधि यह ध्यान रखें कि किसानों को धान बेचने और उसका भुगतान प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो।
प्रदेश की सभी एक हजार 333 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में दो अक्टूबर से माइक्रो एटीएम लगाने का काम शुरू किया जाएगा। इससे किसानों को पैसे निकालने और जमा करने के सुविधा निकट भविष्य में मिलेगी। यह किसानों के लिए भी काफी सुरक्षित होगा। उन्होंने बताया कि लगभग दस लाख किसानों को किसान रुपे कार्ड अब तक वितरित किए जा चुके हैं।
जिला सहकारी बैंकों के विलय के बाद अब प्राथमिक सहकारी समिति और अपेक्स बैंक की द्वि-स्तरीय व्यवस्था होगी। इससे किसानों को ब्याज में ढ़ाई प्रतिशत की बचत होगी। किसानों को समर्थन मूल्य पर वर्ष 2016 में खरीदे गये धान के लिए 2100 करोड़ रुपए के बोनस भुगतान के लिए सभी 27 जिलों में बोनस तिहार मनाया जाएगा। दीपावली के पहले किसानों के खातों में बोनस की राशि ऑन लाइन जमा हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नवनिर्वाचित सहकारी पदाधिकारियों के लिए संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर होंगे। इन शिविरों के माध्यम से सहकारी प्रतिनिधियों को धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद, बीज वितरण के अलावा अन्य छोटे-छोटे व्यवसायों के क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। प्रदेश के स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 52 लाख बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म दिए जाते हैं। यदि सहकारिता के माध्यम से स्कूल यूनिफॉर्म के लिए कपड़े की बुनाई, सिलाई और वितरण का संगठित और सुव्यवस्थित तरीके से किया जाए तो इसके माध्यम से हजारों बुनकरों और महिला समूहों को रोजगार मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में 15-16 समितियां काजू प्रसंस्करण के क्षेत्र में आगे आई हैं। जिससे केरल और अन्य प्रदेशों से काजू छत्तीसगढ़ में प्रसंस्करण के लिए आंऐगे। मत्स्य उत्पादन में छत्तीसगढ़ आज देश में पांचवे स्थान पर है। मत्स्य पालन सहित दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी सहकारिता के माध्यम से काफी काम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रदेश में दो चरणों में 95 प्राथमिक सहकारी समितियों को रसोई गैस वितरण की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके लिए समितियों को बैंकों से कर्ज, गोदाम बनाने के लिए 15 लाख रुपए की सहायता भी दी जा रही है।
सहकारिता मंत्री दयालदास बघेल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले, महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू, संसदीय सचिव चंपादेवी पावले, लोकसभा सांसद कमलभान सिंह, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक बजाज, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता, दुग्ध संघ के अध्यक्ष रसिक परमार और राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष भरत साय उपस्थित थे।

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