छत्तीसगढ़

सिटी कालीबाड़ी में शक्ति ने की शक्ति की उपासना

रायपुर सिटी महा कालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर का दुर्गा पूजा इस वर्ष 57 वें वर्ष में प्रवेश किया जिसके अध्यक्ष स्वर्गीय तरुण चटर्जी रहे। उनके स्वर्गवास पश्चात उनके पुत्र दीप्तेेश चटर्जी हैं जिन्होंने बांगाली समाज के लोगों और समिति के सदस्यों के साथ मिलकर इस वृहद पूजन का आयोजन किया। आज रायपुर सिटी महा कालीबाड़ी में महा अष्टमी की तिथि में नारी शक्ति ने की शक्ति रूपी देवी दुर्गा की उपासना। यह बहुत ही प्राचीन बंगाल की परम्परा है जहां शारदीय दुर्गोत्सव में बंगाल के लोग धुनुची (आरती) नृत्य कर माँ को प्रणाम करते हैं तथा यह आह्वान करते हैं कि मर्त लोक के सभी मनुष्य का माँ दुर्गा मंगल करे और कष्टों का संहार कर जीवन में खुशियाँ दे। जो भी पाप न जाने हुए हैं इसके लिए माँ दुर्गा से प्रार्थना करते हैं और माफी मांगते हैं। घर के बुजुर्ग कहते हैं कि माँ दुर्गा सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी के दिन अपने पूरे शक्ति के साथ विराजमान रहती हैं और इन्ही 3 दिनों में शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा की शक्तियां भक्तों को मिलती है जिससे वे आनेवाले पूरे साल के लिए अच्छे कार्य , मंगल कार्य के लिए तैयार होते हैं। हम इसे पॉजिटिव एनर्जी भी कह सकते हैं जो दुर्गा माँ की प्रतिमा से निकलकर मानव शरीर मे प्रवेश करती है। महा अष्टमी के दिन बंगाली समाज के लोग व्रत रखते हैं और पूरे भक्तिभाव से पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। अष्टमी के दिन बलि देने की भी प्रथा है, लेकिन आज के समय में सफेद कुम्हड़ा, गन्ने की बलि ठीक संध्या पूजा और आरती के पहले दी जाती है। महा नवमी एक विशेष दिन होता है जिसमे कुंवारी कन्या का पूजन होता है तथा । इस कुंवारी कन्या को माँ दुर्गा का स्वरूप माना जाता है जिन्हें भक्तगण पूजन कर कन्या से खुशहाली की प्रार्थना करते हैं और पैर छुंकर प्रणाम करते हैं। कुंवारी कन्या पूजन में 5 वर्ष से 11 वर्ष के कन्याओं का पूजन किया जाता है तथा इसके पश्चात हवन किया जाता है। प्राचीन कथा अनुसार बंगाल के लोगों का यह मानना होता है कि देवी दुर्गा अपने बच्चों के साथ अपने मायके आती हैं और चार दिन मायके में रहकर दशमी के दिन वापस चली जाती हैं। विगत दिन तथा आज सिटी महा कालीबाड़ी में बालिकाएं, स्त्री एवं पुरुषों ने मिलकर धुनुची नृत्य कर शक्ति की देवी माँ दुर्गा का अभिवादन किया और पूरे भक्ति भाव से माँ को धुनुची नृत्य के माध्यम से प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महिलाओं में बानी साहा, ऋचा चक्रबर्ती, नीता पाल, सुप्रिया राय, आनंदित पाल, श्रद्धा होर तथा पुरुषों में गौतम मजूमदार, नारायण राय, मानब गांगुली, दीप चक्रबर्ती, निश्चय सहा, बापी राय, तारक राय, नितिन पाल, असित दास एवं सुदीप्तो चटर्जी ने धुनुची
नृत्य कर देवी दुर्गा का अभिवादन किया। 30 सितंबर दशहरा (विजय दशमी) के दिन माँ दूर्गा के आरती के पश्चात सुहागिन बंगाली महिलाएं देवी दुर्गा को सिंदूर दान के पश्चात एक दूसरे को सिंदूर लगते हैं जिसे “सिंदूर खेला ” कहा जाता है।

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