वनांचल के लिए जीवन दायिनी बनेगा प्रधानपाठ बैराज

सिंचाई के समुचित प्रबंधन से बदलेगी खेती-किसानी की तस्वीर

राजनांदगांव. राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ विकासखंड के सुदूर वनांचल एवं पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सीमा के लछना गांव में निर्मित प्रधानपाठ वनांचल के निवासियों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा। इस प्रधानपाठ बैराज का निर्माण पड़ोस के महाराष्ट्र राज्य से इस अंचल की ओर बहने वाली एवं इस क्षेत्र के प्रमुख आमनेर नदी को बांधकर किया गया है। आमनेर नदी का उद्गम स्थल सीमावर्ती महाराष्ट्र राज्य में है।

आदिवासी बाहुल्य इस लछना क्षेत्र में बैराज निर्माण के पूर्व अल्प वर्ष एवं सूखे की स्थिति में किसानों के फसलों के लिए समुचित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। किसानों को अपने फसलों के लिए पानी की प्रबंध हेतु केवल वर्षा के जल पर ही आश्रित रहना पड़ता था। जिसके फलस्वरूप इस अंचल के किसानों के द्वारा लछना क्षेत्र में बैराज निर्माण कराने के लिए लंबे अरसे से मांग की जा रही थी।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के द्वारा एक कुशल चिकित्सक की भांति इस क्षेत्र के किसानों के मांग एवं आवश्यकताओं की नब्ज को पहचानते हुए क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने हेतु इस प्रधानपाठ बैराज निर्माण की स्वीकृति दी है। इस बैराज के निर्माण से इस अंचल के किसानों की वर्षो पुरानी एवं बहुप्रतिक्षित मांग पूरी हुई है तथा इस क्षेत्र के किसानों के खेतों में हरी-भरी फसल लहलहाने लगेगी।

1759 किसानों के खेतों में पहुंचेगा आसानी से पानी

इस बैराज के निर्माण से इस अंचल के लगभग 1759 कृषकों के खेतों में आसानी से सिंचाई हेतु पानी पहुंच सकेगा। मौजूदा खरीफ वर्ष में प्रधानपाठ बैराज से क्षेत्र के किसानों के 530 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होने से पैदावार में आशातीत वृद्धि हुई है। इस प्रधानपाठ बैराज के माध्यम से किसानों के फसलों के लिए समुचित मात्रा में पानी की प्रबंध होने से इस पूरे क्षेत्र के खेती-किसानी की तस्वीर बदल जायेगी।

प्रधानपाठ बैराज महत्वकांक्षी परियोजनाओँ में से एक

वर्तमान में इस प्रधानपाठ बैराज से लछना क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य ग्राम टेकापार, मुढ़ीपार, अचानकपुर, चांदगढ़ी, खम्हारडीह, टिंगामाली, मुड़पार, कुसुमकुआ, सोनडोंगरी, गुमानपुर, कोपे नवागांव, दैहान, बगईझोरी आदि ग्रामों के किसानों के लगभग 1950 हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ सीजन में सिंचाई सुविधा मिल रही है। बैराज निर्माण के पूर्व इस अंचल के किसानों के खेतों में फसलों के लिए वर्ष का जल ही एक मात्र स्त्रोत हुआ करता था। कुल 59 करोड़ 02 लाख 77 हजार रूपए की लागत से निर्मित की गई प्रधानपाठ बैराज मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की ड्रीम एवं महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। वनांचल के किसानों के खेतों में समुचित सिंचाई सुविधा पहुंचाकर उनके उत्पादन में वृद्धि एवं कृषि को समुन्नत बनाने के उद्देश्य से इस बैराज की स्थापना की गई थी।

किसानों की तकदीर एवं तस्वीर बदलने में सहायक

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मंशा के अनुरूप इस बैराज के निर्माण हो जाने से इस क्षेत्र के खेती किसानी का स्वरूप ही बदल जायेगा। इस सुदूर वनांचल के किसानों के जीवन रेखा प्रधानपाठ बैराज का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के द्वारा सन 2007 में की गई थी। इसके निर्माण कार्य 2013 में शुरू किया गया। छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन की सतत् मॉनिटरिंग एवं तत्परता से आज एक बेहतरीन बैराज का निर्माण कर लिया गया है। इस बैराज का जल ग्रहण क्षेत्र 110.38 वर्ग मीटर है। बैराज की लंबाई 64.80 मीटर तथा ऊंचाई 17 मीटर है। इसके मुख्य नहर साखा नहर एवं माईनर नहर की लंबाई 32.70 कि.मी. है।

कभी सामान्य कल्पना से दूर इस सुदूर वनांचल तथा दुर्गम एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस बैराज का निर्माण कर उनके फसलों के लिए समुचित मात्रा में पानी प्रबंध करने का भगीरथ प्रयास किया है। इसके फलस्वरूप कुछ ही समय में इस क्षेत्र के किसानों की स्थिति एवं खेती किसानी में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलेगा। प्रधानपाठ बैराज इस अंचल के किसानों के लिए बहुउपयोगी सिद्ध होकर इस क्षेत्र के किसानों की तकदीर एवं तस्वीर बदलने में सहायक बनेगी।

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