प्रमोद साहू एवं उनकी टीम ने ऐसे दी लक्ष्मण मस्तुरिया को श्रद्धांजलि

रंगोली में उकेरा लक्ष्मण मस्तुरिया का अश्क

अमृत लाल साहू

भाटापारा।

प्रमोद साहू एवं उनकी टीम मूंधड़ा हाउस में हाइपर रैलस्टिक रंगोली दीवाली में बनाने के हिसाब से जगह का लोकेशन देखने आए थे। उसी समय पता लगा कि साहित्यकार लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन हो गया है। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए रंगोली में उनको पिरोया गया है और दीप जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अपने देश ,अपनी धरती ,अपनी माटी ,, अपनी नदी अपने पंछी अपने पर्वत ,अपने जंगल , अपने खेत, अपने खलिहान ,अपने गांव और अपने लोगों की कोमल भावनाओं को शब्द और आवाज़ देने वालों को समाज अपने दिल में बसा लेता है. फिर चाहे वे कवि हों ,या गायक. अपनी रचनाओं में, अपनी आवाज़ में , मानव मन की संवेदनाओं को, लोगों के दुःख-सुख को जगह देने वाले शब्द-शिल्पी और स्वर-साधक ही कला-संस्कृति के जरिए किसी भी राज्य और देश की पहचान बनाते हैं.

अगर किसी कवि में शब्दों के मोतियों के साथ वाणी का माधुर्य भी हो ,तो उसका शिल्प और सृजन नदियों के संगम की तरह और भी पावन हो जाता है. लक्ष्मण मस्तुरिया की गिनती भी ऐसे सर्वोत्तम शब्द-शिल्पियों में होती है ,जो पिछले करीब चार दशकों से जारी अपनी काव्य -यात्रा में छत्तीसगढ़ के दिल की धड़कनों को छत्तीसगढ़ के दिल की भाषा ‘छत्तीसगढ़ी’ में आवाज़ देकर सही मायने में कवि-धर्म का बखूबी पालन कर रहे हैं . उन्होंने अपने गीतों को मंच और रंग-मंच के साथ -साथ संगीत से भी जोड़ा है.अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक खूबियों से ही कोई भी अंचल देर-सबेर एक राज्य का आकार लेता है।

धरती के भूगोल को राज्य और देश के रूप पहचान दिलाने में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े कवियों, कलाकारों और शिल्पकारों की बहुत बड़ी भूमिका होती है.

आज अगर छत्तीसगढ़ पिछले दस वर्षों से भारत के छब्बीसवें राज्य के रूप में पहचाना जा रहा है ,तो उसमें बहुत बड़ा योगदान लक्ष्मण मस्तुरिया जैसे लोक-प्रिय कवियों का भी है ,जिन्होंने राज्य-निर्माण के भी लगभग तीस बरस पहले कवि-सम्मेलनों और सांस्कृतिक -मंचों पर छत्तीसगढ़ की माटी का जय-गान कर और धरती का जयकारा लगा कर जनता को उसकी आंचलिक-अस्मिता और आंतरिक शक्ति का अहसास दिलाया।

लक्ष्मण जैसे श्रेष्ठ रचनाकार के गीतों की चर्चा करने का एक अपना सुख है ,पर इन गीतों की मिठास तो केवल उन्हें सुनकर ही महसूस की जा सकती है .

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