छत्तीसगढ़

जीका वायरस से बचाव के लिए सावधानियां

मनोज मिश्रा

महासमुंद। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.बी मंगरूलकर ने जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से होने वाली वायरस बीमारियों से बचाव के लिए नागरिको से सावधानी बरतने को कहा है। 

उन्होंने बताया कि जीका वायरस रक्त में पाया जाने वाला आरएनए वायरस है जो कि सिंअप प्रजाति का है, जैसे कि डेंगू, चिकनगुनिया, पित्त, ज्वर, जपानी इन्सफिलाईटिस आदि बीमारी भी इसी समूह का वायरस के द्वारा होता है।

यह बीमारी एडीज एजीटी मच्छर के द्वारा फैलता है। उन्होंने बताया कि जीका वायरस होने का लक्षण तेज बुखार, बदन दर्द, बेचैनी लगना, आंखों में लालिमा, त्वचा पर लाल चकते, जोड़ो में दर्द और मांसपेशियों में दर्द और सिर दर्द होता है।

इससे बचाव एवं सावधानियां बरतने के लिए जीका प्रभावित होन की दशा में यात्रा नहीं करना चाहिए। एडीज मच्छरों की रोकथाम के लिए घर के आसपास पानी जमा होने वाले स्त्रोंतो का नियंत्रण करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।

बिना चिकित्सक की सलाह के एस्पीरिंन दवा का उपयोग बुखार के उपचार के लिए न करें। डायबिटिज, उक्तचाप तथा अन्य बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों तथा गर्भवती महिलाओं का बिना चिकित्सीय सलाह के दवा न ली जाए।

उन्होंने बताया कि जीका वायरस के संक्रमण के लिए विशेष उपचार दवा, वैक्सिन उपलब्ध नहीं है, केवल लक्षण अधारित उपचार दिया जाना होता है। इसके अंतर्गत शरीर में पानी की समुचित मात्रा बनाए रखने के लिए ओआरएस तथा बुखार के लिए पैरासिटामाल की गोलियां ले।

डेंगू मरीज के उपचार के लिए एस्पीरिन दवा का उपयोग नहीं की जाती इसी प्रकार इसके लिए इस दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए।

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