छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में 19 सालों में 157 हाथियों की अकाल मौत और शासन मौन!

बिजली करंट से अब तक करीब 45 हाथियों की मौत

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

रायपुर। राज्य में पिछले 19 वर्षों में 157 हाथियों की असमय अकाल मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने इस सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किया। उनकी लापरवाही के चलते यह सिलसिला लगातार चलता रहा। इसे देखते हुए 2018 को हाईकोर्ट पुलिस में एक जनहित याचिका लगाई थी।

बताया गया है कि बिजली के करंट से अब तक करीब 45 हाथियों की मौत हो चुकी है। लेकिन, वन और विद्युत विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस दौरान हाई कोर्ट ने दोनों ही विभागों को पत्र लिखकर हाथियों की मौत के संबंध में जानकारी मांगी थी साथ ही जिम्मेदारी तय करने कहा था।

जवाब में विद्युत वितरण कंपनी ने वन क्षेत्रों से नीचे जा रही लाइनों और लटकते हुए तारों और बेयर कंडक्टर को कवर्ड कंडक्टर में बदलने के लिए वन विभाग द्वारा 1674 करोड़ रुपए देने पर एक वर्ष अंदर सुधारने का आश्वासन दिया था. व्यवस्था करने विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। इसके जवाब में केंद्र सरकार जो भी शुरू करने के लिए कहा था।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय का हवाला देते हुए पत्र लिखकर आदेशित किया कि टूटे हुए तारों को वितरण कंपनी ठीक करें। उनकी लापरवाही के चलते ही हाथियों की मौत हो रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी जवाबदेह है। बता दें कि करंट से हाथियों की मौत के बाद वन विभाग की ओर से तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा विभाग की प्रमुख सचिव ऊर्जा को पत्र लिखकर रुपए स्वयं के प्रबंध से करके आवश्यक सुधार कार्य करने लिए कहा था।

साथ ही न्यायालय में आदेश के अनुसार वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 एवं उसके अंतर्गत निर्मित नियम, इंडियन पेनल कोड 1860, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 तथा अन्यब सुसंगत विधियों के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

राज्य की भूपेश सरकार भी इन वन्य प्राणियों की सुध नही ले रही और इस तरह एक तरफ वन्य प्राणी विलुप्त होने की कगार पर हैं और दूसरे तरफ ये वन्य प्राणियों की अकाल मौत ऐसे में ये सरकार पर एक सवालिया निशान खड़ा करता है कि किस तरह का वैन मंत्रालय है जो वन्य प्राणियों की सुध नही ले रही फण्ड तो बहोत आते हैं लेकिन सब धरे के धरे राह जाते हैं।

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