2022 में मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की तैयारी

- इसरो को 30 क्षमतावान अंतरिक्षयात्रियों की तलाश

बेंगलुरु।

इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से ऐलान किया था कि भारत आने वाले समय में स्पेस के क्षेत्र में मजबूती से कदम बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत 2022 में अपने किसी बेटे या बेटी को अंतरिक्ष में भेजेगा। इसी वादे को पूरा करने के लिए 2004 में पेश किए गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

पीएम मोदी ने लालकिले से ही इस अभियान को ‘गगनयान’ नाम भी दिया। बता दें कि इस अभियान की जिम्मेदारी इंडियन स्पेस रिसर्च आॅर्गनाइजेशन (इसरो) के कंधों पर होगी। इसरो ने इसके लिए काम भी करना शुरू कर दिया है।

-देशभर की संस्थाओं के लोग करेंगे सहयोग

15 अगस्त से लेकर अबतक इसरो चीफ के सिवन ने तीन बार यह भी कहा है कि यह सिर्फ इसरो मिशन नहीं होगा। उन्होंने कहा, यह एक राष्ट्रीय मिशन होगा, जिसमें देशभर की संस्थाओं के लोग सहयोग करेंगे। सिवन जिन संस्थाओं की बात कर रहे हैं, उनमें एयरफोर्स के अंतर्गत काम करने वाला एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) भी है। सिवन ने बताया कि आईएएम ही उन अंतरिक्षयात्रियों का चयन करेगा जिन्हें 2022 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को भी आईएएम ने ही ट्रेनिंग दी थी।

आईएएम कमांडेंट एयर कॉमोडोर अनुपम अग्रवाल ने बताया कि ट्रेनिंग के अलावा संस्था ने चार प्रमुख क्षेत्रों में योगदान दिया है। ये हैं: बेसिक ऐंड अडवांस ट्रेनिंग, क्रू कैप्सूल की ह्यूमन इंजिनयरिंग और हैबिटैट मॉड्यूल, कैबिनेट एयर क्वालिटी का मूल्यांकन करना और फ्लाइट सर्जन आॅपरेशन।

-ऐसे होगा अंतरिक्ष यात्रियों का चयन

आईएएम चीफ अनुपम अग्रवाल ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि ‘हमें 30 अंतरिक्ष यात्रियों के पूल की जरूरत है, जिसमें से 15 का चयन किया जाएगा और उन्हें बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर तीन यात्रियों को भेजने की योजना बनती है तो हम तीन-तीन लोगों के तीन सेट चुनेंगे और इनमें से किसी एक ग्रुप को लॉन्च डेट से पहले तीन महीने अन्य ट्रेनिंग प्रोग्राम से गुजरना होगा।

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