मध्यप्रदेश

फर्जी अंकसूची तैयार करना अब नही होगा किसी के वश में, जाने पूरी ख़बर!

जिनकी जानकारी केवल और केवल कुलपति व परीक्षा नियंत्रक के पास ही रहेगी।

जीवाजी विश्वविद्यालय की फर्जी अंकसूची तैयार करना अब किसी के वश में नहीं रहेगा। यहां की अंकसूचियां अब नोटों (रुपए) जैसे सुरक्षा मानकों के साथ बनेंगी।

असल अंकसूची की कलर्ड फोटो कॉपी संभव नहीं होगी। आठ सुरक्षा मानकों में से दो गुप्त मानक ऐसे रहेंगे, जिनकी जानकारी केवल और केवल कुलपति व परीक्षा नियंत्रक के पास ही रहेगी।

ऐसे में किसी भी अंकसूची पर शंका होने की स्थिति में ये दोनों तुरंत जान सकेंगे कि अंकसूची विश्वविद्यालय से जारी हुई है या किसी ने तैयार की है।

जीवाजी विश्वविद्यालय में अंकसूचियों की यह नई व्यवस्था, यूएमएस (यूनीवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत की जा रही है।

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने बताया कि नई व्यवस्था में हम अंकसूचियों में सुरक्षा के कई मानकों को अपना रहे हैं।

मसलन अंकसूची बनाने के लिए पार्चड पेपर (विशेष रूप से तैयार कागज) का इस्तेमाल होगा। यह कागज लंबे समय तक खराब नहीं होता है।

इसके अलावा सुरक्षा के विशेष मानक, पहचान चिन्ह रहेंगे। दो गुप्त पहचान चिन्ह भी रहेंगे, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी।

सुरक्षा के ये रहेंगे मानक

कलर्ड कॉपी नहीं : यूएमएस सिस्टम को लागू करने वाले फर्म के प्रतिनिधि अनिल धामणगांवकर के अनुसार यदि असल अंकसूची की कलर्ड स्कैनिंक होगी तो उस पर अंग्रेजी में वायड (शून्य) लिखा हुआ भी स्कैन हो जाएगा।

इस तरह पहली संभावना यहीं खत्म हो जाएगी कि इसकी कलर कॉपी कर इसे बनाया जा सकेगा।

विशेष बार्डर लाइनः अंकसूची के चारों तरफ एक बार्डर लाइन डाली गई है। वास्तव में यह लाइन अंग्रेजी में बेहद बारीकी से लिखे गए जेयूजी की लाइन है।

मैग्नीफाइन ग्लास से देखने पर इसमें जेयूजी दिखाई देगा,यदि इसकी कॉपी की जाएगी तो सिर्फ लाइन ही प्रिंट होगी।

वाटर मार्कः मार्कशीट में सबसे ऊपर जीवाजी विश्वविद्यालय लिखा होने के साथ ही बैक ग्राउंड में वाटर मार्क रहेगा। बीचों-बीच भी वाटर मार्क लोगो।

नीचे की तरफ सोक्स मार्कर व हाई रिज्योल्युशन बार्डर रहेगा। इसके अलावा कागज में विशेष प्रकार के धागे रहेंगे जो पराबैगनी प्रकाश में चमकेंगे।

दो सुरक्षा मानकों की जानकारी केवल कुलपति व परीक्षा नियंत्रक को ही रहेगी।

इसके अलावा जो कागज इस्तेमाल होगा वह विशेष रूप से आर्डर करने पर ही चिन्हित फर्मों द्वारा, चिन्हित फर्मों के लिए ही तैयार होता है। यह बाजार में मिलने वाला आम कागज नहीं होगा।

‘दो तरह की अंकसूची’

जीवाजी विश्वविद्यालय में यूएमएस सिस्टम को लागू करने के बाद हम कई स्तरों पर बदलाव कर रहे हैं। नई व्यवस्था में अब असल अंकसूची की नकल तैयार करना संभव नहीं होगा।

अध्ययनशाला में ग्रेड सिस्टम के लिए लाल बॉर्डर की अंकसूची रहेगी। अन्य छात्रों के लिए आसमानी नीले रंग की बार्डर वाली अंकसूची रहेंगी। कई सुरक्षा मानक ऐसे रहेंगे,जिससे एक नजर में असली-नकली अंकसूची की पहचान हो जाएगी।

-प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर

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