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राष्ट्रपति कोविंद ने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की काफी कम भागीदारी पर जताई चिंता

नई दिल्लीः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी ‘‘अत्यंत कम’’ होने पर आज दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लैंगिक समानता के बगैर उपलब्धियां कभी समग्र नहीं हो सकती . उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में छात्राओं एवं महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक समुदाय से कदम उठाने की अपील की .

कोविंद ने कहा, ‘‘लैंगिक समानता के बगैर हमारे किसी भी विकास लक्ष्य का कोई अर्थ नहीं है . एक संस्था के तौर पर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और एक समाज के तौर पर भारत ने बहुत प्रगति की है, फिर भी हमारे देश में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है .’’ राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में हर 10 वैज्ञानिक शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या दो से भी कम है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में शामिल होने वालों में महिलाओं की संख्या महज 10 प्रतिशत है .

सीएसआईआर की प्लैटिनम जुबली के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘ये आंकड़ा कतई स्वीकार्य नहीं है .’’ महिलाओं के लिए समान अवसरों के बगैर देश के विकास लक्ष्यों का कोई अर्थ नहीं होने की बात कहते हुए कोविंद ने कहा कि यदि असमानता खत्म नहीं की गई तो देश की वैज्ञानिक उपलब्धियां कभी समग्र नहीं होंगी . राष्ट्रपति ने इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया .

कोविंद ने वैज्ञानिक समुदाय से कहा कि नई और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के बीच वह बुनियादी वैज्ञानिक शोध से नजर नहीं हटाएं . उन्होंने कहा कि सीएसआईआर और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं को नई प्रौद्योगिक आत्मसात करने और वैज्ञानिक शोध को मजबूत करने में भारत की मदद करनी चाहिए . सीएसआईआर के काम की तारीफ करते हुए कोविंद ने कहा कि इसमें भारत की तीन-चार फीसदी वैज्ञानिक मानवशक्ति ही शामिल है, लेकिन यह देश के वैज्ञानिक उपलब्धियों में करीब 10 फीसदी का योगदान करता है .

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, नमामि गंगे और स्मार्ट सिटी मिशन जैसे भारत के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम वैज्ञानिकों और सीएसआईआर जैसे इनक्यूबेटरों के बगैर सफल नहीं होते .

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