बैठक में अपनी मांगों को पूरा करने सरकार बनाएंगी आरबीआई पर दबाव

रेग्युलेटर के बीच बढ़ी तनातनी के बीच सोमवार को RBI बोर्ड की मीटिंग होने जा रही

नई दिल्ली। मोदी सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सेंट्रल बोर्ड में फैसले लेने की प्रक्रिया में सरकार की ओर से नॉमिनेट मेंबर्स की ज्यादा सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और उन्हें अहम रेग्युलेटरी मुद्दों से अवगत रखने के लिए बैंकिंग रेग्युलेटर पर दबाव बना सकती है।

सिस्टम में नकदी की उपलब्धता, कमजोर बैंकों पर लगाई गई पाबंदियों, पूंजी की जरूरत और रिजर्व ट्रांसफर जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और रेग्युलेटर के बीच बढ़ी तनातनी के बीच सोमवार को RBI बोर्ड की मीटिंग होने जा रही है।

वरिष्ठ सरकारी अफसरों का कहना है कि 2018 की शुरुआत से आरबीआई और सरकार के बीच सलाह मशविरे की रुटीन प्रक्रिया कमजोर हुई है।

मोदी सरकार RBI गवर्नर की अध्यक्षता वाली अहम कमिटियों के अलावा उन कमिटियों में दखल बनाने की कोशिश कर सकती है, जिसमें उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

एक सूत्र ने बताया, ‘हम बोर्ड फॉर फाइनैंशल सुपरविजन (BFS) और कमिटी ऑफ सेंट्रल बोर्ड (CCB) में ज्यादा सरकारी प्रतिनिधित्व चाहते हैं। मौजूदा ढांचा ऐसा है कि इन कमिटियों में RBI के नॉमिनी अहम संबंधित पक्षों को बताए बिना खुद फैसले ले सकते हैं।’

सूत्र के मुताबिक, ‘सरकार RBI से कह सकती है कि वह इकॉनमी पर असर डाल सकने वाले मुद्दों पर मंजूरी न सही, कम से कम कॉमेन्ट जरूर मांगे। वे जरूरत पड़ने पर हमारे विरोध वाले नोट को पब्लिक डोमेन में तो डाल सकते हैं।’

सेंट्रल बोर्ड को तीन कमिटी- CCB, BFS और बोर्ड फॉर रेग्युलेशन ऐंड सुपरविजन ऑफ पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (BPSS) असिस्ट करती हैं।

एक वरिष्ठ सरकारी अफसर ने कहा, ‘पहले बैक-चैनल बातें होती थीं या फिर औपचारिक तौर पर विचार-विमर्श होता था। अब यह एकतरफा हो गया है। सरकार के पास सेक्शन 7 के तहत चर्चा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है।’

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