प्रधानमंत्री ने दिए बच्चों के सवालों का प्रेरणादायक ज़वाब

विद्यार्थियों को दिया परीक्षा पूर्व तनाव मुक्ति के सुझाओ

सुकमा : शबरी आडिटोारियम में भारत के प्रधानमंत्री का तालकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम परीक्षा पर चर्चा नरेन्द्र मोदी के साथ का सीधा प्रसारण पूर्वान्ह 11.45 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक डी.डी. नेशनल, डी.डी. न्यूज एवं डी.डी. इंडिया द्वारा दूरदर्शन पर तथा आल इंडिया रेडियो पर किया गया। इस अवसर पर छात्रों ने उन्हें विभिन्न टेलीविजन समाचार चैनलों, नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप और माईगोव मंच के माध्यम से सवाल भी पूछा। बातचीत शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि वह छात्रों के दोस्त और उनके माता-पिता और परिवार के रूप में टाउन हॉल सत्र में आए हैं। उन्होंने कहा कि वह विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से पूरे देश में लगभग 10 करोड़ लोगों से बात कर रहे थे। उन्होंने अपने स्वयं के अध्यापकों को स्वीकार किया, जिन्होंने उन में मूल्यों को स्थापित किया था जो उन्हें आज तक छात्र में जीवित रखने में सक्षम बनाता है और उन्होंने सभी को प्रोत्साहित किया कि छात्र को उन में जीवित रहने दें।

लगभग दो घंटे तक चलने वाली इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने घबराहट, चिंता, एकाग्रता, सहकर्मी दबाव, माता-पिता की अपेक्षाओं और शिक्षकों की भूमिका सहित कई विषयों पर चर्चा किए। उनके जवाब बुद्धि, हास्य और कई अलग-अलग उदाहरणों के साथ सुशोभित थे। उन्होंने स्वामी विवेकानंद से आत्मविश्वास के महत्व को लागू करने के लिए उद्धृत किया। परीक्षा तनाव और चिंता से निपटने के लिए उन्होंने कैनेडियन स्नोबोर्डर मार्क मैकमोरीस का उदाहरण दिए, जिन्होंने जीवन की धमकी देने वाली चोट से पीड़ित होने के केवल 11 महीने बाद शीतकालीन ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। एकाग्रता के विषय पर प्रधानमंत्री ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को रेडियो कार्यक्रम मन की बात पर याद किए। तेंदुलकर ने कहा था कि वह केवल गेंद पर केंद्रित है जो वह वर्तमान में खेल रहा है और पिछले या भविष्य के बारे में चिंता नहीं करता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि योग एकाग्रता में सुधार लाने में मदद कर सकता है। सहकर्मी के दबाव के विषय में प्रधानमंत्री ने ‘‘प्रतिदर्श‘‘ (दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा) की बजाय ‘‘अनुग्रहधारी‘‘ (अपने साथ प्रतिस्पर्धा) के महत्व की बात की। उन्होंने कहा कि किसी को पहले जो हासिल किया गया था उससे बेहतर काम करना चाहिए। अपने माता-पिता के लिए हर माता पिता के बलिदान को ध्यान में रखते हुए प्रधान मंत्री ने माता-पिता से आग्रह किया कि उनके बच्चे की उपलब्धियों को सामाजिक प्रतिष्ठा का मामला न बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अनूठे प्रतिभाओं के साथ आशीष है। एक छात्र के जीवन में प्रधानमंत्री ने दोनों बौद्धिक कौशल और भावनात्मक कुएं का महत्व समझाया। समय प्रबंधन पर प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए एक समय सारणी या एक कार्यक्रम पूरे वर्ष के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा लचीला होना और किसी के समय का सबसे अच्छा उपयोग करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री के सीधा प्रसारण उपरान्त कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने स्वयं के विद्यार्थी जीवन के अनुभव को उपस्थितों के बीच साझा किए और साथ ही उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि अपने बच्चों की तुलना किसी और बच्चों से न करें क्यूंकि हर बच्चा यूनिक हैं उन्हें उनके अनुसार ही रहने दें और न ही उन्हें किसी चीज को पढ़ने या चयन करने के लिए दबाव बनाए। साथ ही शिक्षकों से भी आग्रह किए की बच्चों की पढ़ाई की सम्पूर्ण तैयारी दिसम्बर माह तक पूर्ण कर उन्हें उनके परीक्षा की तैयारी करवाएं ताकि परीक्षा में प्रदर्शन कर सकें। साथ ही उन्होंने उपस्थितों से कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ बच्चे तनाव ग्रस्त रहते हैं उनको तनावमुक्त करने के लिए प्रेरणादायक सुझाव दें। बच्चों को अपनी रूचि अनुसार संकायों का चयन करने दें तथा चयन किए गए संकायों को अध्ययन करने में बच्चों की सहायता करें। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र सिंह राठौर, डीएमसी एसएस चैहान, स्कूलों के प्राचार्य, स्कूली छात्र-छात्राएं सहित अन्य उपस्थित रहे।

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