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प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने पोर्ट टर्मिनल की डील को किया रद्द

ट्रेड यूनियंस भारत-जापान संग समझौते का कर रहे थे विरोध

नई दिल्ली: श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भारत और जापान के पोर्ट टर्मिनल डील को रद्द करने की घोषणा कर दी है. हिंद महासागर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे भारत के लिए यह झटका माना जा रहा है.

श्रीलंका ने किया था यह समझौता

श्रीलंका ने दोनों देशों के साथ समझौते के तहत रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ECT) बनाने का फैसला किया था. इस डील में टर्मिनल का 49 फीसदी हिस्सा भारत और जापान के पास होता. श्रीलंका पोर्ट अथॉरिटी के पास इसमें 51 फीसदी का हिस्सा होता है. अब श्रीलंका ने कहा है कि वह वेस्ट कंटेनर टर्मिनल का निर्माण भारत और जापान के साथ मिलकर करेगा.

भारत और जापान के साथ इस समझौते का कोलंबो पोर्ट ट्रेड यूनियंस विरोध कर रहे थे. यूनियंस की मांग थी कि ECT पर पूरी तरह से श्रीलंका पोर्ट का अधिकार हो. यानी 100 फीसदी हिस्सा उसके जिम्मे हो. 23 ट्रेड यूनियंस ने पोर्ट डील का विरोध किया था. यूनियंस का आरोप था कि भारत की अडाणी समूह के साथ ECT समझौता सही नहीं है. सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े हैं ज्यादातर यूनियंस इस समझौते का विरोध कर रहे ज्यादातर यूनियंस सत्तारूढ़ श्रीलंका पीपुल्स पार्टी (SLPP) से जुड़े हुए हैं. उनके विरोध के बाद सरकार इस डील पर आगे नहीं बढ़ रही है.

श्रीलंका कैबिनेट ने दी थी डील को मंजूरी

श्रीलंका में भारतीय हाई कमीशन ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि यह समझौता समय पर पूरा होगा. 2019 में इस डील पर साइन हुए थे। श्रीलंका की कैबिनेट ने इस डील को तीन महीने पहले हरी झंडी दी थी. लेकिन इस डील का श्रीलंका के ट्रेड यूनियंस और विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध किया जा रहा था. वे इस डील को रोकने की मांग कर रहे थे. हिंद महासागर में भारत के लिए अहम थी यह डील पड़ोसी चीन के मुकाबले भारत भी समुद्र में बड़ी बढ़त बनाने के लिए श्रीलंका के साथ यह डील की थी. अब श्रीलंका के इस समझौते को रद्द करना भारत के लिए यह एक रणनीतिक झटका माना जा रहा है.

चीन के कर्ज के जाल में फंसा है श्रीलंका

चीन श्रीलंका के उसके महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट एंड रोड का अहम किरदार मानता रहा है. ड्रैगन ने पिछले दशक में श्रीलंका की कई अहम परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का लोन दिया था. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका को चीन द्वारा दिए गए लोन से ज्यादा लाभ नहीं होने वाला है उसे इसको वापस करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

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