प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ का 42वां संस्करण संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (25 मार्च) को आकाशवाणी पर अपने दैनिक संबोधन 'मन की बात' की शुरुआत में देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ का 42वां संस्करण संबोधित करते हुए रविवार (25 मार्च) को आकाशवाणी पर अपने दैनिक संबोधन ‘मन की बात’ की शुरुआत में देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं.

उन्होंने कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार! आज रामनवमी का पावन पर्व है. रामनवमी के इस पवित्र पर्व पर देशवासियों को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी के जीवन को भी राम के नाम से जोड़ा. पीएम मोदी ने कहा, ‘पूज्य बापू के जीवन में ‘राम नाम’ की शक्ति कितनी थी वो हमने उनके जीवन में हर पल देखा है.’

‘मन की बात’ के मुख्य अंश
*आज पूरे विश्व में भारत की ओर देखने का नज़रिया बदला है. आज जब, भारत का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है तो इसके पीछे माँ-भारती के इन बेटे-बेटियों का पुरुषार्थ छुपा हुआ है.
*कोमल ठक्कर जी ने MyGov पर संस्कृत के on-line courses शुरू करने के बारे में जो लिखा वो मैंने पढ़ा. संस्कृत के प्रति आपका प्रेम देखकर बहुत अच्छा लगा. मैंने सम्बंधित विभाग से इस ओर हो रहे प्रयासों की जानकारी आप तक पहुँचाने के लिए कहा है. ‘मन की बात’ के श्रोता जो संस्कृत को लेकर कार्यरत रहते हैं, वो भी विचार करें कि कोमल जी के सुझाव को कैसे आगे बढ़ाया जाए.

*बिहार के घनश्याम कुमार जी- आपके #NarendraModiApp पर लिखे comments मैंने पढ़े. आपने जमीन में घटते जल-स्तर पर जो चिंता जताई है, वह निश्चित रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है.
*शकल शास्त्री जी, कर्नाटक – आपने शब्दों के बहुत ही सुन्दर तालमेल के साथ लिखा कि ‘आयुष्मान भारत’ तभी होगा जब ‘आयुष्मान भूमि’ होगी और ‘आयुष्मान भूमि’ तभी होगी जब हम इस भूमि पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी की चिंता करेंगे. आपने गर्मियों में पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने के लिए भी सभी से आग्रह किया है. शकल जी, आपकी भावनाओं को मैंने सभी श्रोताओं तक पहुँचा दिया है.

*उत्तरप्रदेश की एक महिला अनेकों संघर्ष के बावजूद 125 शौचालयों का निर्माण करती है और महिलाओं को उनके हक़ के लिए प्रेरित करती है- तब मातृ-शक्ति के दर्शन होते हैं.
*असम के करीमगंज के एक रिक्शा-चालक अहमद अली ने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर ग़रीब बच्चों के लिए नौ स्कूल बनवाये हैं, इससे देश की अदम्य इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं.
*कानपुर के डॉक्टर अजीत मोहन चौधरी की कहानी सुनने को मिली कि वो फुटपाथ पर जाकर ग़रीबों को देखते हैं और उन्हें मुफ़्त दवा भी देते हैं, इससे देश के बन्धु-भाव को महसूस करने का अवसर मिला.

*13 साल पहले, समय पर इलाज़ न मिलने के कारण Kolkata के Cab-चालक सैदुल लस्कर की बहन की मृत्यु हो गयी, तब उन्होंने अस्पताल बनाने की ठान ली ताकि इलाज़ के अभाव में किसी ग़रीब की मौत न हो. सैदुल ने अपने इस mission में घर के गहने बेचे, दान के ज़रिये रूपये इकट्ठे किये. उनकी Cab में सफ़र करने वाले कई यात्रियों ने दिल खोलकर दान दिया. इस तरह से रुपये जुटाकर 12 वर्षों के बाद, आख़िरकार सैदुल लस्कर ने कोलकाता के पास पुनरी गाँव में लगभग 30 bed की क्षमता वाला अस्पताल तैयार करवाया, यह है New India की ताक़त.

Back to top button