प्रधानमंत्री टेरीजा मे की योजना को संसद ने भारी बहुमत से किया ख़ारिज

उन्होंने सांसदों से उनकी योजना को समर्थन देने की अपील की

ब्रितानी: ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की योजना को मिली इस ऐतिहासिक हार के बाद विपक्षी लेबर पार्टी ने सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास मत का प्रस्ताव दिया है. लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने कहा कि संसद ने भारी बहुमत से प्रधानमंत्री के ब्रेक्सिट डील को ख़ारिज किया है.

यहां तक कि ख़ुद टेरीज़ा मे की कंज़र्वेटिव पार्टी के 118 सांसदों ने विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर इस डील के ख़िलाफ़ वोट दिया. टेरीज़ा मे की योजना को 432 सांसदों ने ख़ारिज कर दिया और उन्हें केवल 202 सांसदों का समर्थन मिल सका.

सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास का प्रस्ताव पर बहस

किसी बिल या मसौदे पर ये किसी भी मौजूदा सरकार के लिए सबसे बड़ी हार है. लेकिन ये भी सच है कि विपक्षी लेबर पार्टी के तीन सांसदों ने डील का समर्थन किया. उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास का प्रस्ताव रखा जिस पर बुधवार को बहस होगी.

ब्रेक्सिट डील पर मिली इतनी बड़ी हार के बाद टेरीज़ा मे के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं. लेकिन कई सांसदों और टेरीज़ा मे की सरकार को समर्थन देने वाले दलों ने साफ़ किया है कि उन्होंने इस डील का विरोध किया है, प्रधानमंत्री का नहीं.

अगर बुधवार को टेरीज़ा मे सदन का विश्वास हासिल करने में नाकाम रहती हैं तो उन्हें या किसी और को 14 दिनों के अंदर सदन का विश्वास हासिल करने का मौक़ा मिलेगा. लेकिन अगर कोई सरकार नहीं बन पाती है तो फिर ब्रिटेन में आम चुनाव की घोषणा होगी.

मतदान से पहले टेरीज़ा मे ने अपनी योजना को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया. उन्होंने संसद में बहुत ही भावुक और आवेशपूर्ण भाषण में कहा कि इस योजना पर मतदान उनके राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल है.

उन्होंने सांसदों से उनकी योजना को समर्थन देने की अपील की. क्या आप भी नहीं समझ पा रहे हैं कि ब्रिटेन में चल क्या रहा है?

इस मतदान के बाद क्या होगा?

टेरीज़ा मे संसद में दोबारा ये योजना पेश कर सकती हैं और संसद की मंज़ूरी हासिल कर सकती हैं. वो यूरोपीय संघ से दोबारा बातचीत कर सकती हैं और एक नए समझौते के साथ संसद में आ सकती हैं.

ब्रेक्सिट को लेकर जनता के पास दोबारा जनमत संग्रह के लिए भी जाया जा सकता है. लेकिन अगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो 29 मार्च, 2019 को ब्रिटेन बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा.

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