छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री का संबोधन जले पर नमक छिड़कने के समान -माकपा

देश के सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की

रायपुर: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सचिवमंडल ने देश के गरीबों को सिर्फ 5 किलो अनाज देने की घोषणा को अपर्याप्त और जले पर नमक छिड़कने के समान बताते हुए कहा है कि स्वास्थ्य मानकों के आधार पर यह किसी व्यक्ति के लिए आवश्यक न्यूनतम 2100 कैलोरी पोषण-आहार की जरूरत को भी पूरा नहीं करता. इस पेशकश से सिर्फ 2 करोड़ टन अनाज की ही निकासी होगी, जबकि सरकारी गोदामों में 11 करोड़ टन अनाज भरा पड़ा है और करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं.

14 करोड़ लोगों को रोजी-रोटी का नुकसान

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि ऐसी स्थिति में जबकि 14 करोड़ लोगों को रोजी-रोटी का नुकसान हुआ है और 8 करोड़ प्रवासी मजदूर अभी भी घर वापसी का प्रयास कर रहे हैं, जनधन खातों में महज 500 रुपये देने की बात कहना उनके कष्टों का मजाक उड़ाना ही है.

इसी प्रकार पूर्व में घोषित 14 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान योजना का लाभ दिए जाने का दावा नौ करोड़ किसानों तक सीमित होकर राह गया है और पांच करोड़ किसानों को इस योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है. लेकिन किसानों के लिए इस योजना का पैसा देना कोई अतिरिक्त राहत नहीं है, क्योंकि यह योजना बजट प्रावधान का ही हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि घर वापस हुए मजदूरों को मनरेगा में काम दिए जाने का केंद्र सरकार का दावा भी झूठा ही है. यदि अतिरिक्त एक करोड़ लोगों को भी 100 दिनों का काम देना है, तो उसके लिए 2.5 लाख करोड़ रुपयों की जरूरत होगी, जबकि सरकार ने इतनी राशि का इंतज़ाम ही नहीं किया है.

माकपा नेता ने प्रधानमंत्री के इस दावे को भी हवा-हवाई बताया है कि उनकी सरकार कोरोना महामारी का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर रही है. उन्होंने कहा कि विश्व में कोरोना टेस्ट की सबसे नीची जांच दर होने के बावजूद आज विश्व में कोरोना पॉजिटिव मामलों में तीसरे स्थान पर होना और कोरोना से होने वाली मौतों में तेजी से वृद्धि होना ही उनके दावे की असलियत उजागर कर देता है. माकपा ने कोरोना टेस्ट सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार करने, सभी स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सार्वभौमिक बनाने की मांग भी की है.

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button