प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना: आशियाने का सपना अब हो रहा साकार

इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक प्रत्येक पात्र परिवार को स्वंय का घर उपलब्ध कराना है |

दिल्ली : प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) PMAY-U के तहत 1.12 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई, जिसमें से 83 लाख से अधिक घर धरातल पर उतर चुके है। 50 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है और लोगों ने रहना शुरू कर दिया। इस योजना को 6 साल पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का शुभारम्भ 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया था। देश के शहरी इलाको के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग तथा मध्यम आयवर्ग के गरीब परिवार, जिनके पास खुद का घर नहीं है या कच्चे घर हैं, उन्हें स्वयं का पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए इस योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक प्रत्येक पात्र परिवार को स्वंय का घर उपलब्ध कराना है |

बजट

मिशन के तहत अब तक स्वीकृत मकानों में 7.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जिसमें 1.81 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। अब तक, केंद्रीय सहायता के रूप में 100,000 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी राशि के निवेश ने अर्थव्यवस्था को गति दी है।

वित्तीय सहायता के अन्य माध्यम

निर्माण गतिविधियों की गति को बनाए रखने के लिए निरंतर वित्त पोषण सहायता के लिए, बजटीय समर्थन के अलावा, राष्ट्रीय शहरी आवास कोष (एनयूएचएफ) के तहत ईबीआर के माध्यम से 60,000 करोड़ रुपये का एक कोष जुटाया गया था, जिसमें 43,000 करोड़ पहले ही निकाले जा चुके हैं। पिछले 3 वर्षों में अफोर्डेबल हाउसिंग फंड से ₹20,000 करोड़ का उपयोग किया जा रहा है।

दी जा रही है कई तरह की सब्सिडी

पीएमएवाई-यू की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) के तहत पहली बार होम लोन पर ब्याज सब्सिडी मध्यम आय वर्ग को दी गई है, यानी जिनकी वार्षिक आय ₹18 लाख तक है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और एमआईजी से संबंधित लगभग 16 लाख लाभार्थियों को अब तक सीएलएसएस के तहत लाया गया है। इसके तहत अब तक 36465 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा चुकी है।

किफायती रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स योजना

मिनिस्ट्री ऑफ होउसिंग एण्ड अर्बन अफेयर्स (MoHUA) ने शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए PMAY (U) के तहत एक उप-योजना, किफायती रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (ARHCs) लॉन्च की है। इस योजना के मॉडल 1 के तहत, चंडीगढ़ और सूरत (गुजरात) में कुल 2,588 घरों को शुरू किया गया है और अन्य राज्यों में 6,649 घरों के लिए आरएफपी जारी किए गए हैं। मॉडल 2 के तहत, अब तक 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में सार्वजनिक/निजी संस्थाओं से लगभग 80,000 एआरएचसी इकाइयों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

आपको बता दें, 30 जून 2021 की अंतिम तिथि के साथ अतिरिक्त इकाई की शॉर्टलिस्टिंग के लिए ईओआई का दूसरा राउंड शुरू किया जायेगा।

रोजगार

इस क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए वर्तमान निवेश ने लगभग 689 करोड़ व्यक्ति दिवसों का रोजगार सृजित किया है, जो लगभग 2.46 करोड़ नौकरियों के बराबर है और 370 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 84 लाख मीट्रिक टन स्टील की खपत हुई है। वहीं एआरएचसी के तहत निवेश से 3.89 करोड़ प्रत्यक्ष और 7.84 करोड़ अप्रत्यक्ष के साथ 11.74 करोड़ व्यक्ति दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह 1.39 लाख प्रत्यक्ष और 2.80 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियों के साथ कुल 4.191 लाख नौकरियों के बराबर होगा।

एआरएचसी को जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय प्रतिक्रिया मिली है। योजना के मॉडल 2 के तहत, 17 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से लगभग 80,000 इकाइयों के लिए सार्वजनिक/निजी संस्थाओं से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे उत्साहित होकर, एमओएचयूए ने एआरएचसी के तहत प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए दूसरा ईओआई जारी किया है।

कोरोना काल में मिली मदद

कोरोना काल में लगभग 22,000 PMAY-U घरों का उपयोग COVID सुविधाओं के रूप में किया गया। प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट 2004 से 2014 तक 10 वर्षों में 0.38 लाख करोड़ और 2015 से 2021 तक 6 वर्षों में 7.35 लाख करोड़ हुआ है। यह अपने आप में बहुत बड़ा अंतर है।

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