जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज करेंगे प्राइवेट डॉक्टर

नीति आयोग ने बुधवार को इसके लिए गाइडलाइंस और मॉडल कंसेशन अग्रीमेंट किया

नई दिल्ली। आयुष्मान भारत के तहत जिला अस्पतालों में गैरसंक्रामक रोगों के इलाज के लिए सरकार प्राइवेट फर्मों को जोड़ेगी। नीति आयोग ने बुधवार को इसके लिए गाइडलाइंस और मॉडल कंसेशन अग्रीमेंट पेश किया।

इससे सरकारी जिला अस्पतालों में प्राइवेट फर्मों को लाया जा सकेगा। प्राइवेट फर्मों को ट्रांसपैरंट और कॉम्पिटीटिव बिडिंग के आधार पर चुना जाएगा और राज्य सरकार को अपनी जरूरत के आधार पर इन गाइडलाइंस में बदलाव करने की अनुमति होगी।

सरकार ने ‘पे पर यूजर’ मॉडल का सुझाव दिया है, जिसके तहत राज्य सरकारें जिला अस्पतालों में स्थान उपलब्ध कराएंगी और प्राइवेट फर्में गैरसंक्रामक रोगों के उपचार के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के साथ ही इक्विपमेंट और मैनपावर उपलब्ध कराएंगी।

सरकार इन प्राइवेट फर्मों को प्रति प्रोसीजर या सर्विसेज के पैकेज के लिए फीस का भुगतान करेगी। यह फीस प्राइवेट पार्टनर चुनने के समय कॉम्पिटीटिव बिडिंग के जरिए तय की जाएगी। अग्रीमेंट 15 वर्षों के लिए होगा और इसे रीन्यू करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

गाइडलाइंस के अनुसार, गैरसंक्रामक रोगों के इलाज के लिए सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बीच भागीदारी से जिला स्तर पर निर्धन तबके के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी और राज्य के बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी।

राज्यों के पास मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल, सर्विसेज मॉडल को खरीदने, बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर मॉडल या को-लोकेशन मॉडल का विकल्प मौजूद होगा।

आयुष्मान भारत को दुनिया में सरकारी फंडिंग वाली सबसे बड़ी हेल्थकेयर स्कीम बताया जा रहा है। इसका मकसद 10 करोड़ से अधिक निर्धन और कमजोर परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराना है। इसमें प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाएगा।

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