प्रदेश के निजी अस्पतालों ने कोरोना आपदा को बनाया लाभ का अवसर

कोरोना की तवाही का मंजर छत्तीसगढ़ में साफ देखा जा रहा है।

रायपुर। प्रदेश में गरीब और मरीजों की सेवा के लिए स्थापित निजी अस्पतालों में लूट मचा रखी है। चार दिन का इलाज का खर्च चार लाख सुनकर तो मरीज का मौत होना तय है। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही इलाज का मीटर ऐसे दौड़ता है कि जब तक मरीज के परिजन हॉफ नहीं जाए। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, में ऑक्सीजन बेड के नाम पर लूट मचा दी है। जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार की केबिनेट बैठक में निजी अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट कहा था कि मरीज की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन बेड, वेंटिलेटर की सुविधा मरीजों को उपलब्ध कराए न कि किसी सिफारिश के आधार पर गंभीर मरीज की जगह सिफारिशी को दी जाए। उनके बाद भी जो खबरे आ रही है वह मानवता को कलंकित कर देने वाला ही है।

कोरोना की तवाही का मंजर छत्तीसगढ़ में साफ देखा जा रहा है। कोरोना मरीजों की मरने की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना संक्रमण के सामने दो विकल्प है सरकारी और निजी अस्पताल की व्यवस्था भी चरमराने लगी है। सरकारी अस्पतालों में तो मरीजों को रखने की जगह नहीं है ऐसे में मजूबरन निजी अस्पताल में इलाज कराने मरीज को भर्ती कराने के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बमुश्किल बिस्तर और इलाज का इंजाम हो पा रहा है। निजी अस्पतालों में तो इलाज शुरू होने से पहले टेस्ट और अन्य जांच के नाम पर भारी भरकम रकम ली जा रही है। मरीज का इलाज हो और वो ठीक हो जाए तो भी तान से चार लाख का बिल थमाया जा रहा है। वहीं मरीज की मौत होने पर भी इलाज के नाम पर पूरा पैसा वसूला जा रहा है।

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