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दो प्लेन क्रैश और सैकड़ों लोगों की मौत के बाद 737 मैक्स एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन बंद

एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन बंद होने से अमेरिका को अरबों डालर के नुकसान का अंदेशा

बोइंग: बोइंग कंपनी 103 साल से एयरप्लेन बना रही है. पिछले दशक भर में इनके खास एयरक्राफ्ट 737 मैक्स के दो बड़े हादसे हुए हैं. अक्टूबर 2018 में इंडोनेशिया में एक प्लेन हादसा हुआ था.

इस साल मार्च में भी 737 मैक्स का एक प्लेन इथोपिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ. इनमे लगभग 346 लोगों की मौत हुई. इन हादसो के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन प्राधिकरण इन हादसों की जांच कर रही है.

जांच में पाया गया कि पायलट और अन्य तकनीकी गड़बड़ियों के अलावा प्लेन निर्माण में भी कुछ सुरक्षा पहलुओं को नजरअंदाज किया गया. पिछले साल भर से 737 मैक्स एयरक्राफ्ट के निर्माण की जांच हो रही थी. सोमवार को अमरीका में अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन प्राधिकरण ने इस एयरक्राफ्ट के प्रोडक्शन बंद करने का फैसला दिया.

स्पाइसजेट समेत 21 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां करती है भारत में ऑपरेट

यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए विभिन्न सिविल एविएशन कंपनियां नए एयरक्राफ्ट खरीदती हैं. बोइंग के आधिकारिक वेबसाईट के अनुसार पूरी दुनिया के 100 सिविल एविएशन कंपनियों ने 5000 नए एयरक्राफ्ट खरीदने का ऑर्डर दिया था. इनमें से 21 एविएशन कंपनियां ऐसी हैं जो भारत में अपनी सेवा देते हैं.

मतलब साफ है कि भारत में उड़ान भरने वाली कई कंपनियों को अब नए एयरोप्लेन खरीदने की जगह पुराने से ही काम चलाना होगा. इसकी वजह से लाखो भारतीय यात्रियों को पुराने एयरक्राफ्ट में यात्रा से ही संतोष करना होगा.

पिछले कुछ महीनों में इंडिगो व अन्य एयरलाइंस के एयरक्राफ्ट ग्राउंडड होने की वजह से कम एयरक्राफ्ट उपलब्ध होंगे. इसकी वजह से यात्रियों को किराए बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है.

बोइंग नुकसान में चलने लगी है

स्टॉक एक्सचेंज में बोइंग के शेयर प्रतिशत गिर चुके हैं. मार्च में हुए दुर्घटना के बाद कंपनी को लगभग 8 बिलियन डालर अदा करना पड़ा है. सालाना 52 एयरक्राफ्ट तैयार करने वाली बोइंग इस साल सिर्फ 42 प्लेन ही तैयार कर पाई.

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