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दिल्ली दंगे में आगजनी करने वालों की संपत्ति जब्त होगी-गृह मंत्री शाह

नई दिल्ली: आज लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर बहस हुई। इस दौरान विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब दिया। जवाब के बीच में ही कांग्रेस के सांसद सदन से बाहर निकल गए।

चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि दिल्ली दंगे के दौरान आगजनी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा, ‘दिल्ली दंगा को राजनीतिक दंग देने का प्रयास हुआ है।

जिन लोगों की जान गई है उनके लिए दिल से दुख व्यक्त करता हूं। जो मारे गए उनके परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त करना चाहता हूं। कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें आज की चर्चा में नहीं बोलना चाहता, लेकिन जिस तरह इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को रखने का प्रयास हुआ इसलिए इस पर स्पष्ट करना चाहूंगा।

गृह मंत्री अमित शाह के भाषण के अपडेट 

दिल्ली पुलिस ने दंगाईयों को भगाने के लिए पत्थरबाजी की थी। 5000 से ज्यादा टीयर गैस के सेल छोड़े गए। लाठीचार्ज किया गया। पुलिस ने घनी आबादी होने के बावजूद दंगे को दबा देना पुलिस की प्राथमिकता थी।

दंगा किसी को अच्छा नहीं लगता है। मगर एक सोची समझी साजिश के तहत यह हुए यह मेरा मानना है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। दिल्ली दंगे में मारे गए लोगों को बख्शा नहीं जाएगा, इसका मैं आश्वासन देता हूं।

भारत के इतिहास में दंगों में मारे गए लोगों में 76 प्रतिशत कांग्रेस के राज में। 194 के दंगा के आरोपियों को हमने सजा दिलाई है।

अंकित शर्मा की शरीर पर 400 घाव किए गए, इस पर भी ओवैसी बोलते तो बेहतर होता।

दिल्ली दंगे में 52 भारतीयों की मौत हुई है। मंदिर और मस्जिद दोनों जले हैं। 526 भारतीय घायल हुए।

दंगे के दौरान संपत्तियों के नुकसान करने वाले लोगों से पैसे वसूले जाएंगे। इसके लिए हम हाईकोर्ट से जज की मांग की है।

दिल्ली में दंगे के दौरान पैसे पहुंचाए गए। सोशल मीडिया के जरिए घबराया गया। हम इसकी जांच कर रहे हैं। एक नेता ने 15 करोड़ वाली बात कही।

14 दिसंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली होती है। लोगों से घर से बाहर निकलने के लिए कहा जाता है। घर के बाहर निकलो आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए कहा गया है। 16 दिसंबर से शाहीनबाग का धरना शुरू।

24 फरवरी से पहले सीेएए के विरोध से ज्यादा सीएए के समर्थन में रैलियां निकली हैं। यह कहना गलत है कि समर्थन वाली रैलियों के कारण दंगा हुआ।

मुस्लिम पर्सनल लॉ धर्म के आधार पर बना कानून है। देश में ढेर सारे कानून धर्म का आधार पर बने हैं।

जबसे सदन ने सीएए का बिल पास किया, उसके बाद से युवाओं को गुमराह करने की कोशिश हुई। सीएए से किसी की भी नागरिकता नहीं जाती है। पीड़ितों को नागरिकता देने का प्रावधान है।

वैज्ञानिक आधार पर पूरे दंगा की जांच कर रहे हैं। किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा।

दिल्ली दंगों के फाइनेंस करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोई भी दोषी को बच नहीं पाएगा।

दिल्ली में जितने कम समय में दंगा हुआ उससे यह साजिश लगता है। हम इसका भी पता लगा रहे हैं।

सभी धर्मों के लोगों के 600 से अधिक शांति समिति की बैठक हम कर चुके हैं।

चेहरा पहचाने वाले शॉफ्टवेयर के माध्यम से 1100 लोगों की पहचान कर ली गई है। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। नरेंद्र मोदी सरकार किसी भी दोषी को नहीं बचाएगी।

24 फरवरी की रात से यूपी का बॉर्डर को सील कर दिया गया। दोनों समुदायों के लोगों पर एफआईआर हुए हैं।

वीडियो फुटेज से अंकित शर्मा के हत्यारों को पकड़ा जाएगा।

27 फरवरी से आज तक 700 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई है। ओवैसी बोल रहे थे कि एक ही धर्म के लोगों को दिक्कत है। ऐसी बात नहीं है। सीसीटीवी फुटेज की जांच चल रही है। मीडिया से फुटेज मांगा है। दिल्ली की जनता ने हजारों की संख्या में वीडियो भेजे हैं।

दिल्ली हिंसा को देखते हुए कुल 80 से अधिक कंपनियों को हिसाग्रस्त इलाके में भेजा गया है। मुस्तैदी से गुनाहगारों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मेरे ही सलाह पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल मौके पर गए।

मैंने गुजरात से आने के बाद दिल्ली पुलिस के साथ बैठक करता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम मे शामिल नहीं हुआ।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगा को 36 घंटे में समेटने का काम किया है। 25 फरवरी के बाद कोई हिंसा नहीं हुई।

दिल्ली दंगा को लेकर पुलिस पर उठे सवाल पर अमित शाह ने कहा कि पुलिस पर पहला काम था कि इसे बढ़ने नहीं देना। पुलिस ने उसे रोका। मैं इसके लिए धन्यवाद देता हूं।

अधीर रंजन ने पूछा कि चर्चा में क्यों देरी हुई? 25 फरवरी के बाद एक भी घटना दंगा की नहीं हुई है। यह डिबेट की मांग दो तारीख के बाद की गई थी और मैंने कहा था कि इस पर होली के बाद चर्चा करेंगे क्योंकि होली के दौरान फिर कुछ अलग जगहों पर दंगा भड़क सकती थी। पुलिस को तह में जाने के लिए भी कुछ समय चाहिए था।

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