पुलिस के अधिकारों की रक्षा करें मानव अधिकार आयोग – विनोद तिवारी

युवा जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी ने बताया पुलिस परिवार बहुत ही जायज मांगों को लेकर संघर्षरत है जिसे सरकार द्वारा कुचलने की कोशिश की जा रही है। जो कि बहुत ही शर्म का विषय है। वही नक्सल क्षेत्र में तैनात जवानों का बीमा एक करोड़ करने की मांग को लेकर पिछले 14 महीनों से हम लोग संघर्षरत है। जिस कड़ी में चरणबद्ध आंदोलन किया गया। डी.जी.पी., गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री को ज्ञापन, धरना प्रदर्शन, मौन रैली, मशाल रैली, पैदल मार्च मुख्यमंत्री निवास, पैदल मार्च राजभवन, गिरफ्तारी दर्जनों कार्यक्रम किये गये। पर सरकार ने इस मामले को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया। जबकि प्रदेश में हजारों जवान शहीद हुये। शहीदी का सिलसिला लगातार जारी है। फिर भी सरकार का इस गंभीर मसले पर मौन रहना शर्मनाक है। 

विनोद तिवारी ने कहा कि सरकार शराब बेच सकती है। विधायकों का वेतन बढ़ा सकती है। मुफ्त में मोबाईल बांट सकती है। करीना के ठुमके लगवा सकती है, तो जवानों का बीमा व पुलिस परिवार की मांगों को क्यों पूरा नहीं कर सकती ? 

पुलिस परिवार की मांगों को लेकर आज दोपहर 1.00 बजे युवा जनता कांग्रेस के पदाधिकारी छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग पहुंच अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संयुक्त सचिव श्री दिलीप भट्ट को पुलिस कर्मियों के मानव अधिकारियों की सुरक्षा हेतु ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा कि –

1. पुलिस कर्मियों से राज्य शासन 18 से 24 घंटे की सेवा ले रही है, जो कि किसी भी कर्मचारी द्वारा सेवा स्वरूप लिए जा रहे अधिकतम समय (8 घंटे) का उल्लंघन है और इस तरह सरकार पुलिस कर्मियों के मानव अधिकारों का हनन व उनका शोषण कर रही है।
2 पुलिस कर्मियों को उनकी सेवाओं के बदले में दिया जाने वाला वेतन तथा भत्ते सरकार के प्रशिक्षित श्रमिकों के न्यूनतम वेतन कानून के अनुरूप भी नहीं है। उदाहरणार्थ (1) साइकल भत्ता 18 रू. मासिक (2) स्वास्थ्य भत्ता 250 रू. (3) आवास भत्ता 600 रू. (4) वर्दी भत्ता 60 रू. (5) पौष्टिक आहार 100 रू. मासिक

3 भारत के अन्य राज्यों में पुलिस कर्मियों को वेतन (सिपाही तथा हवलदार) 25000/- रूपये से 28000/- रूपये मासिक तथा सेवा समय 8 घंटे प्रतिदिन है, जबकि छत्तीसगढ़ में 18 से 24 घंटे सेवा के एवज में 16000 रू. मासिक वेतन दिया जाता है। ओवरटाइम का भी प्रावधान नहीं है।

4 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस कर्मियों का एक करोड़ रू. का बीमा किए जाने का भी हमने मांग किया था तथा इसे लेकर कई बार शासन को ज्ञापन भी दिया गया परन्तु सरकार इसे लागू नहीं कर रही। नक्सल समस्या के चलते हजारों जवानों की शहादत हो चुकी है और उनके आश्रित परिवार वाले बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर है। 
5 नक्सल क्षेत्र में तैनात कई जवानों को जंगल वार की ट्रेनिंग अभी तक नहीं दी गई है।  उन्हें नक्सल क्षेत्र में तैनात किया गया है। 

6 पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जाता। इससे प्रायः सभी जवान मानसिक तनाव में रहते है तथा अवसाद में घिरकर कई जवानों ने आत्महत्याएं की है। 

7 ऐसी परिस्थितियों में पुलिस कर्मियों के परिजनों द्वारा अभी हाल में किए गए धरना व प्रदर्शन के लिए पुलिस कर्मियों को नोटिस देना, बर्खास्त करना अपने हक के लिए बात करने पर गिरफ्तार करना भी उनके मानव अधिकारों का तथा प्राकृतिक न्याय का भी उल्लंघन है।

विनोद तिवारी ने संयुक्त सचिव से उपरोक्त बिन्दुओं पर उचित कार्यवाही करते हुये पुलिस कर्मियों के मानव अधिकारों की रक्षा हेतु निवेदन किया।

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