छत्तीसगढ़

वन और वन्य प्राणियों का संरक्षण सबकी जिम्मेदारी : विधायक

जगदलपुर : 2 अक्टूबर से चल रहे वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह का समापन वन विद्यालय के समारोह कक्ष में शनिवार को हुआ। इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित जगदलपुर विधायक और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष संतोष बाफना ने कहा कि, वन और वन्य प्राणियों का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। बस्तर में आज से 20-25 वर्ष पहले वन्य प्राणी सहज ही दिखाई देते थे। कांगेर घाटी में तेंदुआ और भानपुरी के पास उन्होंने बाघ देखने की बात भी बताई। उन्होंने कहा कि, विकास की दौड़ में अब वन्य प्राणी पीछे छूट रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन के प्रयासों से प्रदेश के अभ्यारण्यों में वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे वहां का सौन्दर्य बढ़ा है।
मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव ने राजकीय पशु वन भैंसा के संरक्षण के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, वन भैंसा- भैंसा प्रजाति का तथा गौर गौ प्रजाति का पशु है। वन भैंसा इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, उदंती अभ्यारण्य और मानस राष्ट्रीय अभ्यारण्य असम में पाया जाता है। छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले वन भैंसों की प्रजाति सबसे शुद्ध है इसलिए इसे राजकीय पशु का दर्जा प्राप्त है। इस प्रजाति के सरंक्षण के लिए विभाग की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम को जिला पंचायत सदस्य बोमड़ाराम मंडावी और जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन की अध्यक्ष प्रिया मुचाकी ने भी संबोधित किया। वन मंडलाधिकारी राजू अगसिमनि ने सप्ताह भर संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस दौरान वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के दौरान संचालित साइकिल रैली, निबंध लेखन, चित्रकला, भाषण प्रतियोगिता और क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

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