प्राकृतिक संसाधनों की रक्षक – ज्योतिष विद्या

संपूर्ण मानव जाति का जीवन, प्रगति, अस्तित्व और विकास प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। प्राकृतिक संसाधन है तो मानव जाति है। पाषणकाल से ही मानव जीवन प्रकॄति से प्राप्त वास्तुओं पर ही रहा है। पर्यावरण, वनस्पति और पशुओं पर मनुष्य जीवन जीवित रहा है। प्रकृति ही मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने का एक मात्र साधन रही है। ऐसे सभी पदार्थ, वस्तुएं और ऊर्जा संसाधन जिनका उपयोग व्यक्ति अपने उपयोग के लिए करता है।

समय के साथ इनकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। इस बारें में कोई संदेह नहीं कि मानव जाति को बचाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाना आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण ढ़ंग से प्रयोग कर मानव जाति को लुप्त होने से बचाया जा सकता है। यहां संरक्षण से हम सभी को यह नहीं समझना चाहिए कि इनका प्रयोग करना ही बंद कर दिया जाए या जरुरत होने पर व्यय ना किया जाए और प्रयोग ना करके भविष्य के लिए सहेजा जाए।

अपितु प्राकॄतिक साधनों के बचाव से अभिप्राय: इन संसाधनों का समझदारी से प्रयोग करने के साथ इनके अधिक से अधिक प्रयोग के साधनों पर ध्यान लगाने से है। कुछ ऐसा करना कि अधिक से अधिक व्यक्ति इसका लाभ ले सकें और ये समय के साथ इनकी मात्रा बढ़ती रहें –

आधुनिक समय में साधनों का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है। आवश्यकताएं महत्वपूर्ण हो गई है, और अन्य सभी विषय गौण हो गए है। जनसंख्या विस्फोट के कगार पर है। इसी के चलते रोटी, कपड़ा और मकान जैसी सुविधाओं की मांग द्स गुणा बढ़ गई है। स्थिति यह है कि इसकी वजह से वनों को साफ किया जा रहा है। इससे मिट्टी का कटाव बढ़ता जा रहा है। खेती की भूमि को रिहायस के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

वनों का कट्ना, पानी, हवा और जीव-जन्तुओं की कमी का कारण बन रहा है। खनिज पदार्थ भी बढ़ती हुई आबादी के कारण प्रभावित हुए है। संचित संसाधन लगभग समाप्त हो गए है। आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी – पंचतत्वों पर मनुष्य जाति और ज्योतिष दोनों निर्भर करते है। औद्योगिक हो या प्राकृतिक संसाधन सभी की खपत अपने उच्चतम स्तर को छू रही है।

उत्पादन से अधिक मांग है। हर ओर हो रहे गलत प्रयोग के चलते आज प्रकॄति का संतुलन बिगड़ गया है। संतुलन बिगड़ने से मनुष्य जाति का पूरा अस्तित्व ही खतरे के चिन्ह पर आ गया है। आज हम सभी को इसके संरक्षण के लिए विचार करने की आवश्यकता है-

प्रत्येक ग्रह एक तत्व को नियंत्रित करता है। बुध = पृथ्वी, चंद्र और शुक्र = पानी, सूर्य व मंगल = आग, बृहस्पति = आकाश , शनि = वायु। प्रत्येक तत्व एक ऊर्जा से जुड़ा है, और प्रत्येक ऊर्जा एक ग्रह से प्रभावित है:

आकाश

आकाश तत्व बृहस्पति ग्रह के अंतर्गत आता है। आकाश में होने वाली प्राकृतिक घट्नाओं को गुरु ग्रह के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। आकाशीय पिंडों में होने वाले टकराव के लिए भी गुरु ग्रह की स्थिति का ही विचार किया जाता है। आकाश में बिजली का गिरना, बादल का फटना या आकाश में बनने वाली विभिन्न आकृतियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में होने वाली घट्नाओं का फलादेश किया जा सकता है।

पृथ्वी

पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व बुध ग्रह करता है। पृथ्वी पर बढ़ती हुई आपदाओं के लिए बुध ग्रह को पीडित होते हुए देखा गया है। किसी राज्य, या राष्ट्र विशेष में पृथ्वी पर होने वाली आपदाओं को रोकने और स्थान विशेष को समझने के लिए उस स्थान / देश की कुंडली में बुध ग्रह का पाप ग्रहों के प्रभाव में आना है। बुध तीव्रगति ग्रह है, और सामान्यत: यह पाप ग्रहों से पीड़ित हो सकता है। ऐसे में अति की स्थिति को समझना होगा।

अग्नि

सूर्य अग्नि पुंज है। और मंगल ग्रह अग्नि तत्व ग्रह है। धरा पर जंगलों में बढ़ती अग्नि की घट्नाओं के लिए मंगल ग्रह का विचार किया जाता है। मंगल जब अशुभ ग्रहों से पीड़ित होता है तो यह देखा गया है कि जंगलों में आग लगने जैसी घटनाएं होती है।

जल

समुद्र में आने वाली सुनामी, ज्वारभाटॆ और समुद्री तूफान का कारक ग्रह शुक्र और चंद्र है। जलतत्व को नियंत्रित करने वाले ग्रह शुक्र और चंद्र है। इन ग्रहों का वायु प्रधान राशियों में चंद्र-शुक्र का पाप ग्रहों के द्वारा पीडित होना समुद्री सुनामी की वजह बनता है।

वायु

वायु तत्व का कारक ग्रह शनि है। शनि को शुक्र और चंद्र का साथ जल में वायु तूफान की वजह बनता है। वायु को अग्नि अर्थात मंगल का साथ मिलने से जंगलों की आग विकराल रुप धारण करती है। गोचर में शनि की स्थिति से जंगलों की आग और वायु तूफानों के आने के समय का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

उपरोक्त योगों का सूक्ष्मता से अध्ययन करने पर प्राकृतिक आपदाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रकृति में होने वाली घट्नाओं से जान-माल की हानि बड़े पैमाने पर होती है। इससे बड़े पैमाने पर वस्तुओं का नुकसान भी होता है। भविष्य में किस स्थान पर किस प्रकार की घट्ना घटित होने वाली यह जानने के लिए इन सभी ग्रहों का राशियों के साथ गहन अध्ययन करना होगा। इससे सटिक परिणाम सामने आ सकते है।

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