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पूनम राउत: वर्ल्ड कप फाइनल में कमाल दिखाने वाली इस क्रिकेटर के पिता हैं ड्राइवर, मां सिलती हैं कपड़े

गणेश राउत अपना माथा खुजाते हुए कहते हैं, “ये नहीं होना चाहिए था।” गणेश रविवार (23 जुलाई) की रात की एक बात याद करके अफसोस कर रहे थे। उनकी बेटी और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओपनर पूनम राउत को महिला विश्व कप के फाइनल में पगबाधा (एलबीडब्ल्यू) आउट करार दिया गया था। भारत ने इस फैसले के खिलाफ डीआरएस रिव्यू लेने में बहुत वक्त लगा दिया। 86 के निजी स्कोर पर पूनम के आउट होने के बाद मैच का पासा पलट गया और भारतीय टीम महज नौ रनों से हारकर विश्व कप जीतने में विफल रही। राउत के आउट होने के बाद भारत ने अगले छह विकेट महज 28 रनों के अंतराल पर खो दिए थे।

गणेश राउत फाइनल में मिली हार के बाद हताश हैं लेकिन पूनम का पिता होने के नाते उनके पास दिन भर लोगों के फोन आते रहते हैं। एक स्थानीय पार्षद देश वापसी पर पूनम का भव्य स्वागत करना चाहते हैं। हवाईअड्डे से घर तक उन्हें विशेष गाड़ी में लाने की तैयारी है। गणेश राउत कहते हैं, “अगर टीम जीत गई होती तो हम नाच रहे होते।” लेकिन पड़ोसियों के लिए 27 वर्षीय पूनम एक स्टार बन चुकी हैं। बोरीवली वेस्ट की एक इमारत के पहली मंजिल पर रहने वाली पूनम साधारण परिवार से आती हैं। पूनम के पिता बताते हैं कि इसी इलाके में पूनम पली-बढ़ी हैं। यहीं उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया। गणेश कहते हैं, “वो अक्सर गली के लड़कों के संग क्रिकेट खेलती थी क्योंकि लड़कियां नहीं होती थीं।”

गणेश राउत 31 साल से गाड़ी ड्राइवर की नौकरी कर रहे हैं। उनके छोटे से घर में पूनम की क्रिकेट किट रखने की जगह नहीं है।

पूनम की क्रिकेट किट उनकी गाड़ी में रहती है। पूनम की मां गीता सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं। गीता बताती हैं कि पूनम को बचपन से फ्राक और स्कर्ट की जगह जींस, टीशर्ट इत्यादि पहनना पसंद था। गीता कहती हैं, “वो कभी बाल भी नहीं बढ़ाती थी।” पूनम का छोटा भाई कनाडा के एक होटल में असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर काम करता था।

पूनम के लिए लॉर्ड्स के मैदान तक सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता को अभी भी याद है कि किस तरह पूनम को क्रिकेट अकादमी में भेजने के लिए उन्हें अपने मालिक से 10 हजार रुपये उधार लेने पड़े थे। पूनम के छोटे भाई को कैंसर हो जाने से परिवार की आर्थिक और भावनात्मक संकट से गुजरना पड़ा। गणेश कहते हैं, “ऐसा भी वक्त आया जब चीजें काबू से बाहर हो जाती थीं लेकिन मैं और गीता सोचते थे कि बस कुछ और दिनों की बात है।” अब गणेश को किसी से उधार नहीं लेना पड़ता। पूनम अपनी पूरी तनख्वाह उन्हें ही सौंप देती हैं। गणेश कहते हैं, “मैं उसका पिता हूं, ड्राइवर हूं और चार्टर्ड अकाउंटेंट भी।’ हमारी बातचीत के दौरान भी गणेश के फोन पर मैसेज और कॉल आते रहे। जाहिर है बोरीवली और आसपास के लोग अपनी नायिका के स्वागत को लेकर बेहत उत्सुक हैं।

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