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60 साल बाद ओपेक से अलग होगा कतर, ये है कारण

पिछली बार 2016 में इंडोनेशिया ने अपनी सदस्यता वापस ले ली थी क्योंकि वह कुछ वर्ष पहले उसे खुद तेल आयात करने की नौबत आ पड़ी

नई दिल्ली। कतर ने 6 दिसंबर को होने वाले ओपेक देशों की मीटिंग से ठीक पहले बड़ा ऐलान किया। कतर का सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और बहरीन के साथ जून से ही तनाव चल रहा है कतर का कहना है कि वह तनाव के कारण नहीं, बल्कि LNG पर फोकस करने के लिए ओपेक से अलग हुआ।

अक्टूबर 2018 में कतर ने ओपेक की ओर से रोजाना हुए तेल उत्पादन में 1.83 का योगदान दिया था।

कतर ने सोमवार को ऐलान किया कि वह 1 जनवरी 2019 को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से अलग हो जाएगा। उसने 1961 में ओपेक में शामिल हुआ था और अब 60 वर्ष बाद इससे निकलने जा रहा है।

ओपेक दुनिया में कुल 44 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करता है। इस संगठन की स्थापना ऑइल मार्केट की मॉनिटरिंग करने और कच्चे तेल की दरों एवं इसकी आपूर्ति में स्थिरता कायम रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने या घटाने का निर्णय लेने के लिए हुआ।

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