विचार

राही’ के व्यंग्य बाण : समस्या लीक होने की

सन् 1984 में भोपाल शहर में जहरीली गैस लीक हो गई थी। हजारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ गया था। आज तक लोग न्याय की आस में भटक रहे हैं। गैस लीक का गुनाहगार रातोंरात फरार हो गया, क्या मजाल भागने की सूचना लीक हो जाए। घोटालेबाज देश के बाहर सकुशल पहुंच जाते हैं तो पता चलता है कि, महोदय फलां देश में हैं। देश के विमान, देश द्वारा जारी पासपोर्ट सब बेबस दिखते हैं इनके आगे। सारी व्यवस्था इतनी चाकचैबंद होती है कि, लीक तो क्या नमी तक नहीं दिखती।

पिछले दिनों नोटबंदी हुई, सूचना लीक नहीं हुई। विपक्षियों ने बहुत हल्ला मचाया। पैसों का मामला नाजुक होता है, काफी काम की चीज है पैसा। सावधानी रखनी पड़ती है। सरकार ने रखी सावधानी, पीटते रहिये आप छाती। नोट बेकार हो गये। बात लीक हो जाती तो बच जाते, ये शेख चिल्ली के ख्वाब हैं। अब इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा के पर्चे लीक हो गये। भला पर्चे और पैसों की क्या बराबरी है? हो गये लीक तो हो गये। सरकार इतनी ठाली नहीं बैठी कि, एक-एक बंडल पर्चे की हिफाजत करे। एक-एक बंडल रूपये की हिफाजत करनी पड़ती है। रूपया आखिर रूपया है। पर्चे का क्या फिर हो जायेगी परीक्षा। कौन सा दुबारा परीक्षा लेने से बच्चे सरकार पर फाइन ठोक देंगे ? फाइन ठोकने का अधिकार सिर्फ सरकार के पास है। बहुत हल्ला मचाया बच्चों ने, फिर बेचारे शांत हो गये। दुबारा होने वाली परीक्षा की तैयारी जो करनी थी।

अब तो हर चीज लीक हो रही है। राज्य में होने वाले चुनाव की तारीख लीक हो गयी। खूब बावेला हुआ, कारण बताओ नोटिस जारी हो गये। दरअसल अपने देश में किसी के पेट में कोई बात पचती ही नहीं, या ऐसा भी कह सकते हैं हमारे नागरिक काफी सामाजिक हैं। हर बात घर, परिवार समाज के साथ साझा कर लेते हैं। यह अपना सद्गुण है। हम बेवजह इसे दुर्गुण माने बैठे हैं।

कौन मुख्यमंत्री पद का दावेदार है? किस मंत्री की छुट्टी होने वाली है ? सूचना लीक हो ही जाती है। उस दिन श्रीमती कहने लगी – ‘‘सुनते हैं जी, घर की टंकी लीक हो रही है।‘‘ मेरे मुंह से अनायास निकल गया – मुख्यमंत्री लीक हो रहे हैं, अपना टंकी लीक हो गयी कौन सी बड़ी बात है। जवाब सुन श्रीमती ने माथा पीट लिया।

अब तो भगवान की व्यवस्था भी लीक हो रही है, कब बारिश होगी, मौसम विभाग सूचना पहले ही दे देता है। और तो और सोनोग्राफी के द्वारा पेट में पल रहे बच्चे के लिंग का पता चल जाता है। सारी सूचना लीक हो जाती है और बच्चा बेचारा गर्भ में ही फेल कर दिया जाता है।

विक्कीलिक्स नामक कम्पनी ने विदेशों में काला धन रखने वालों के नाम लीक कर दिये। सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा, मामला विदेश का जो था। देशी काले धन की सूचना लीक हुई नहीं कि छापा पड़ जाता है, आखिर बात पैसों की है, परीक्षा के प्रश्न पत्र की नहीं। लाख सावधानी रखने के बावजूद भी इश्क-मोहब्बत की खबरें लीक हो जाती है। अब पर्चे लीक हो ही गये तो इतना बवाल क्यों ?

अच्छे दिन चोरी हुए, बेबस चौकीदार।
लीक हुई पेपर सभी, वीक हुआ व्यापार।।

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