छत्तीसगढ़

बढ़ते तापमान में रबी फसलों में नियमित सिंचाई जरूरी

रायपुर: कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने विगत कुछ दिनों से बढ़े तापमान के कारण रबी मौसम की फसलों में नियमित सिंचाई करने की सलाह किसानों को दी है। उन्होंने आज यहां जारी विशेष कृषि बुलेटिन में कहा है कि इस मौसम में बढ़ते हुए तापमान के कारण वाष्पीकरण की दर भी बढ़ने लगती है। वर्तमान में वाष्पीकरण दर 4-5 मिलीमीटर हो गई है। इस स्थिति में रबी फसलों को अधिक पानी की जरूरत है।

रायपुर: कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने विगत कुछ दिनों से बढ़े तापमान के कारण रबी मौसम की फसलों में नियमित सिंचाई करने की सलाह किसानों को दी है। उन्होंने आज यहां जारी विशेष कृषि बुलेटिन में कहा है कि इस मौसम में बढ़ते हुए तापमान के कारण वाष्पीकरण की दर भी बढ़ने लगती है। वर्तमान में वाष्पीकरण दर 4-5 मिलीमीटर हो गई है। इस स्थिति में रबी फसलों को अधिक पानी की जरूरत है।

कृषि वैज्ञानिकों ने विशेष बुलेटिन में किसानों को यह भी सुझाव दिया है कि फसलों में कीट नाशक के साथ कोई अन्य दवा या रसायन मिलाकर छिड़काव नहीं करना चाहिए। दवाई का छिड़काव दोपहर बाद करने से ज्यादा असरकारी होता है। गर्मी की धान फसल को तना छेदक के प्रकोप से बचाने के लिए प्रारंभिक तौर पर प्रकाश प्रपंच अथवा फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करना चाहिए।

गर्मी के मूंग और मूंगफल्ली में मल्च के रूप में पौधों के बीच धान का पैरा डालने की सलाह दी गई है, ताकि वाष्पीकरण की दर कम की जा सके। चने की फसल को बड़ी इल्लियों से बचाने के लिए प्रोफेनोफास और साइपरमेथ्रिन मिश्रित कीट नाशक 40 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। कद्दू वर्गीय सब्जियांे की बोआई का उपयुक्त समय है। पिछले माह रोपण की गई सब्जियों में गुड़ाई कर नत्रजन उर्वरक का उपयोग किया जाना चाहिए।

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