पीजी के खाने से परेशान राधिका ने खोली रेहड़ी

रिलायंस में एचआर की जॉब छोड़ी

नई दिल्ली। अधिकतर हम सुनते है की कोई लाखों, करोड़ों की नौकरी छोड़ वापस भारत आया है और छोटा व्यवसाय खोला है ठीक ऐसे ही मामला चंडीगढ़ की है राधिका अरोड़ा की है .

उन्होंने रिलायंस में एचआर की जॉब छोड़कर खाने की रेहड़ी खोली है। राधिका की रेहड़ी पर राजमा-चावल, कढ़ी-चावल, दाल-चावल, रोटी सब्जी सहित वह सब है, जो घर में बनते हैं।

इसका स्वाद वैसा ही लगेगा, जैसे मां के हाथ से बने खाने का होता है। इसीलिए राधिका ने रेहड़ी का नाम मां का प्यार रखा है। मूल रूप से अंबाला की रहने वाली राधिका अरोड़ा ने बताया कि बीकॉम की पढ़ाई के बाद एमबीए करने के लिए वह चंडीगढ़ आ गई।

लांडरां ग्रुप ऑफ कॉलेजेज से एमबीए की पढ़ाई के दौरान उसे पीजी में रहना पड़ता था। पढ़ाई ठीक चल रही थी, लेकिन पीजी का खाना परेशान करता था। न तो स्वाद होता और न ही पका होता। ऊपर से पैसे काफी देने पड़ते थे। ऐसे में राधिका अपनी मां के पकाए खाने का बहुत मिस करती थी।

राधिका को आइडिया आया और उसने ठान लिया कि वह कुछ ऐसा करेगी कि वर्किंग लोगों को घर का खाना मिले। हालांकि इसके लिए राधिका को सबसे पहले घर वालों को मनाना पड़ा।

राधिका के पिता गैस एजेंसी चलाते हैं। जब राधिका ने बताया कि वह अपनी नौकरी छोड़कर खाने की रेहड़ी लगाना चाहती है तो यह सुनकर घर वाले हैरान रह गए। राधिका ने बताया कि फूड बिजनेस में उसने अपनी सेविंग लगाई है।

जॉब के दौरान उसने जो पैसा बचाया था, उसका इस्तेमाल फूड कार्ट में किया। वह रोजाना 70 प्लेट खाना बनाती है। दोपहर एक से लेकर तीन बजे तक उसकी रेहड़ी पर खाना मिलता है।

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