राफेल डील :सौदे पर हस्ताक्षर के समय मैं पावर में नहीं था : राष्ट्रपति मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रेसवार्ता में दिया

संयुक्त राष्ट्र :

राफेल डील मामले में फसे मोदी सरकार के साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यह सौदा दो देशों की सरकारों के बीच हुआ है। और जब रह सौदा हुआ तब मैं पावर में नहीं था ।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर एक प्रेसवार्ता में दिया। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत सरकार ने किसी बिंदु पर फ्रांस या फ्रांसीसी दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट से कहा था कि उन्हें राफेल करार के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर रिलायंस को स्वीकार करना है।

भारत ने करीब 58,000 करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए गत वर्ष सितंबर में फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे डेढ़ साल पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरिस यात्रा के दौरान इस प्रस्ताव की घोषणा की थी। विमानों की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी।

मैक्रों पिछले साल मई में फ्रांस के राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों को बताया, ‘मैं बहुत साफ-साफ कहूंगा कि यह सरकार से सरकार के बीच हुई बातचीत थी और मैं सिर्फ उसी बात की तरफ इशारा करना चाहूंगा जो पिछले दिनों पीएम मोदी ने बहुत स्पष्ट तौर पर कही।’

मैक्रों ने राफेल सौदे पर विवाद के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, ‘मुझे और कोई टिप्पणी नहीं करनी। मैं उस समय पद पर नहीं था और मैं जानता हूं कि हमारे नियम बहुत स्पष्ट हैं।’

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि दो सरकारों के बीच यह अनुबंध एक व्यापक ढांचे का हिस्सा है जो भारत-फ्रांस के बीच सैन्य व रक्षा गठबंधन है।

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