राफेल सौदे : फिर बढ़ेगी मोदी सरकार की मुश्किलें, कांग्रेस प्रहार को तैयार

इस विषय पर केंद्र सरकार ने साधी चुप्पी

नई दिल्ली :

राफेल लड़ाकू विमान सौदे की वजह से केंद्र सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार पर प्रहार के ताक मे तैयार बैठा है। कांग्रेस पार्टी आए दिन नये खुलासे कर रही है और केंद्र सरकार ने इस विषय पर चुप्पी साध रखी है।

राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर वहां की ट्रेड यूनियनों के बीच हुई मीटिंग के ब्योरे भी सार्वजनिक हो गए हैं। केंद्र सरकार भले ही गोपनीयता समझौते का उदाहरण देकर राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत न बता रही हो लेकिन यह शर्त रिलायंस डिफेस पर लागू नहीं होती।

अनिल धीरू भाई अंबानी की स्वामित्व वाली कंपनी ने फरवरी 2016 में ही इस ऑफसेट करार को ऐतिहासिक और बड़ा करार बताया है। कंपनी ने अपने लेटर हेड पर जारी वक्तव्य में बताया है कि यह 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा 23 सितंबर 2016 को 60 करोड़ रुपये (778 अरब यूरो) में हुआ है।

सौदे की पचास फीसदी यानी 30 हजार रुपये की राशि दसॉल्ट रिलायंस एरोस्पेस लिमिटेड के जरिए खर्च होगी। कंपनी ने रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की सहायक कंपनी बताया

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