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औपचारिक रूप से वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल हुआ राफेल

भारत को मिले राफेल लड़ाकू विमान करीब 24,500 किलोग्राम तक का भार उठाकर ले जाने के लिए सक्षम

नई दिल्ली: आज पांच लड़ाकू विमान राफेल औपचारिक रूप से एयर फोर्स में शामिल हुआ. इस मौके पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंबाला एयरबेस पर सर्व धर्म पूजा की गई। फिर राफेल आसमान में उड़ान भरकर अपनी ताकत का अहसास कराया। साथ ही स्वदेशी एयरक्राफ्ट तेजस का एयर डिस्प्ले भी हुआ।

राफेल को वाटर कैनन से दी गई सलामी

अंबाला एयरबेस पर राफेल लड़ाकू विमान को वाटर कैनन से सलामी दी गई। सभी 5 राफेल विमान को दी गई सलामी। फ्लाईपास्ट के शुरू होने के साथ ही 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान राफेल आसमान में करतब भी दिखाया। बता दें कि भारतीय वायुसेना में 5 राफेल लड़ाकू विमान शामिल हुए हैं।

तेजस ने आसामान में दिखाया अपना पराक्रम

देश में निर्मित तेजस लड़ाकू विमान ने अपना करतब दिखाया। अंबाला एयरबेस तेज की उड़ान से रोमांचित हो गया। वहां बैठे गणमान्य अतिथियों ने ताली बजाकर तेज की उड़ान का स्वागत किया।

हेलीकॉप्टर सारंग ने भी दिखाए करतब

रंग-बिरंगे हेलीकॉप्टर सारंग ने भी राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने का जश्न मनाया और अपना करतब दिखाया।

एयर शो में सुखोई, जगुआर और तेज ने भी लिया भाग

राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद हुए एयर शो में सुखोई, जगुआर, देश में निर्मित स्वदेसी तेजस जैसे लड़ाकू विमान शामिल हुए। तेजस की उड़ा ने सबको प्रभावित किया।

राफेल के लिए हुई सर्व धर्म पूजा

5 धर्मों के धर्मगुरुओं ने राफेल को वायुसेना में पूरे पूजा पाठ के साथ शामिल कराया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, फ्रांस की रक्षा मंत्री, सीडीएस बिपिन रावत, एयरफोर्स चीफ भदौरिया इस मौके पर मौजिद रहे।

29 जुलाई को भारत आए थे राफेल विमान

29 जुलाई को फ्रांस से 5 राफेल विमान अंबाल के एयरफोर्स बेस में पहुंचे थे। इनमें तीन सिंगल सीटर और दो ट्विन सीटर जेट हैं। अंबाला एयरबेस में जगुआर और मिग-21 फाइटर जेट भी हैं। राफेल का दूसरा बैच अक्टूबर तक आने की उम्मीद है। इसमें तीन से चार फाइटर जेट हो सकते हैं।

17वीं स्क्वॉड्रन का हिस्सा बनेंगे ये जेट

राफेल फाइटर जेट वायुसेना की 17वीं स्कवॉड्रन का हिस्सा बनेंगे। इस स्क्वॉड्रन को गोल्डन ऐरो स्क्वॉड्रन नाम दिया गया है। 17 वीं स्क्वॉड्रन को करगिल युद्ध के दौरान पूर्व एयरफोर्स चीफ बीएस धनोवा कमांड कर रहे थे। यह स्क्वॉड्रन 1951 में बनी थी और तब भटिंडा एयरबेस से ऑपरेट करती थी। जब मिग-21 फाइटर जेट फेजआउट होने लगे तो यह 2016 में डिस्बैंड हो गई। अब यह स्क्वॉड्रन राफेल की होगी।

राफेल लड़ाकू विमानों की खासियत क्या हैं और क्यों दुश्मन इससे घबराया हुआ है, एक नज़र डालिए…

  1. राफेल लड़ाकू विमान का कॉम्बैट रेडियस 3700 किलोमीटर है, साथ ही ये दो इंजन वाला विमान है जिसको भारतीय वायुसेना को दरकार थी.
  2. राफेल में तीन तरह की मिसाइल लगाई जा सकती हैं. हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर मिसाइल, हवा से जमीन में मार करने वाल स्कैल्प मिसाइल और हैमर मिसाइल.
  3. राफेल लड़ाकू विमान स्टार्ट होते ही ऊंचाई तक पहुंचने में अन्य विमानों से काफी आगे है. राफेल का रेट ऑफ क्लाइंब 300 मीटर प्रति सेकंड है, जो चीन-पाकिस्तान के विमानों को भी मात देता है. यानी राफेल एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है.
  4. लद्दाख सीमा के हिसाब से देखें तो राफेल लड़ाकू विमान फिट बैठता है. राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है. यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है. इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं.
  5. एक बार फ्यूल भरने पर यह लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है. ये हवा में ही फ्यूल को भर सकता है, जैसा इसने फ्रांस से भारत आते हुए किया भी था.
  6. राफेल पर लगी गन एक मिनट में 2500 फायर करने में सक्षम है. राफेल में जितना तगड़ा रडार सिस्टम है, ये 100 किलोमीटर के दायरे में एकबार में एकसाथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है.
  7. भारत को मिले राफेल लड़ाकू विमान करीब 24,500 किलोग्राम तक का भार उठाकर ले जाने के लिए सक्षम हैं, साथ ही 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की भी गारंटी है.
  8. राफेल में अभी जो मिसाइलें लगी हैं, वो सीरिया, लीबिया जैसी जगहों में इस्तेमाल हो चुकी हैं. इसके अलावा जल्द ही SPICE 2000 को भी इसमें जोड़ा जाएगा.
  9. भारतीय वायुसेना को अभी तक पांच राफेल लड़ाकू विमान मिले हैं, जबकि 2022 तक इनकी संख्या कुल 36 हो जाएगी. जिसे अलग-अलग एयरबेस पर तैनात किया जाएगा.
  10. राफेल लड़ाकू विमान अभी अंबाला एयरबेस पर तैनात हैं, जो चीन और पाकिस्तान सीमा के पास है. ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में ये बिल्कुल भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

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