क्रोध करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है : ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी

शिविर के तीसरे दिन क्रोध पर विजय -विषय पर अपने विचार व्यक्त की

रायपुर: माउण्ट आबू से प्रकाशित ज्ञानामृत की सम्पादक एवं वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने कहा कि क्रोध करने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। हमारी अन्त:स्त्रावी ग्रन्थियों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। हार्ट अटैक आने की सम्भावना सामान्य आदमी से तीन गुणा ज्यादा बढ़ जाती है। ब्लड प्रशर बढ़ जाता है। मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और कार्यक्षमता घट जाती है।

ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विश्व शान्ति भवन चौबे कालोनी रायपुर में आयोजित तनावमुक्ति एवं शान्ति अनुभूति शिविर के तीसरे दिन क्रोध पर विजय -विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रही थीं।

उन्होंने आगे कहा कि पांच मिनट के क्रोध से दो घण्टे की कार्यक्षमता नष्ट हो जाती है। क्रोध की अवस्था में विचार बहुत ही तेज गति से चलने लगते हैं जिससे शारीरिक उर्जा व्यर्थ ही नष्ट होने लगती है। क्रोध के बाद थकावट का अनुभव होता है। हमें अब अपनी उर्जा को निर्माण कार्य में लगाना है।

थोड़े समय का पागलपन होता है क्रोध

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि क्रोध थोड़े समय का पागलपन होता है। क्रोधी व्यक्ति का स्वभाव सदा के लिए चिड़चिड़ा हो जाता है। क्रोध से तनाव उत्पन्न होता है जो कि फिर डिप्रेशन में बदल जाता है। राजयोग से क्रोध पर नियंत्रण किया जा सकता है।

उन्होंने बतलाया कि विभिन्न शास्त्रों में भी क्रोध से बचने की शिक्षा दी गई है। श्रीमद्भगवद्गीता में लिखा है कि क्रोध में व्यक्ति दिग्भ्रमित और पागल सा हो जाता है। उसकी बुद्घि नष्ट हो जाती है जिससे फिर सर्वनाश हो जाता है। बाईबिल में लिखा है कि अपने शत्रुओं से भी प्यार करो। जो तुम्हारा अपमान करे तुम उनके लिए प्रार्थना करो। कुरान में लिखा है कि जो लोग क्रोध को पी जाते हैं और अपराध को क्षमा कर देते हैं उन्हें अल्लाह भी माफ कर देते हैं।

क्रोध आने के कारण बतलाते हुए उन्होंने कहा कि जब इच्छानुसार काम नहीं होता है या हमारी सलाह नही मानी जाती है तब गुस्सा आता है। इसी प्रकार यदि कुछ नुकसान हो जाए या कोई झूठ बोले तो भी गुस्सा आ जाता है। इसके अलावा यदि कोई अपमान करे, निन्दा करे या झूठे लांछन लगाए तब भी गुस्सा आता है।

ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने क्रोध से बचने की उपायों की चर्चा करते हुए कहा कि क्रोध आने पर कम से कम २० सेकण्ड तक कुछ न बोलें। मौन धारण कर लें। एक गिलास ठण्डा पानी पी लें। मन में बीस बार ओम शान्ति शब्द का उच्चारण करें। क्षमाभाव धारण करें और राजयोग का अभ्यास करें।

क्रोध का शरीर पर दुष्प्रभाव:

ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने कहा कि क्रोध करने से हमारी ८० से अधिक स्नायुओं में तनाव बढ़ता है। जिससे सिरदर्द या कमरदर्द हो सकता है। क्रोध के बाद थकावट का अनुभव होता है। पाचन शक्ति नष्ट हो जाती है। एसीडिटी बढ़ जाती है। क्रोध के समय लार पैदा करने वाली ग्रन्थियाँ काम करना बन्द कर देती हैं। जिसके कारण मुंह सूख जाता है और ज्यादा प्यास लगती है। क्रोधी व्यक्ति जल्दी बूढ़ा हो जाता है।

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