कोटमी के ‘जंगल सत्याग्रह’ में राहुल गांधी करेंगे आवाज बुलंद

बिलासपुर । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि पेण्ड्रा के कोटमी में आयोजित जंगल सत्याग्रह में राहुल गांधी 17 मई को भाग लेंगे। आखिर जंगल सत्याग्रह की क्यों जरूरत पड़ रही है यह सोचने का विषय है ? आजादी के 70 बरस के बाद एक बार फिर इस तरह का सत्याग्रह आदिवासियों को करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है, यह प्रदेश का दुर्भाग्य है।
आज इसे पत्थरगड़ी का नाम देकर आदिवासियों को अपना संवैधानिक हक मांगने के लिये मजबूर होना पड़ा है।

आदिवासी अंचलो में जंगल सत्याग्रह का स्वरूप बदल गया है और भाजपा सरकार की हुकूमत में आदिवासियों के साथ हो रहे अत्याचार, असुरक्षा, उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ किए जाने, अधिकारो से वंचित किए जाने, आदिवासियों पर हमला होने, जल, जंगल और जमीन पर सरकार की बुरी नजर, आदिवासियों को बसाहटो और पट्टे से वंचित किया जाना, जीवन यापन का अधिकार छीनने, आदिवासियों के साथ न्याय न होने, अत्याचार और दमन करने, संरक्षित जन-जातियो की संख्या में कमी होने, कुपोषण का शिकार होने, जंगलो में व्यापक खनिज उत्खनन कर वनो को नष्ट करने, सड़को के चैड़ी करण, रेलमार्गो का निर्माण, बड़े बिजली के पोल लगाने, मोबाईल टावर लगाने, जंगल की संस्कृति नष्ट करने, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ-शिक्षा से आदिवासियों को उपेक्षित रखने से वनवासियों में इस सरकार के प्रति व्यापक नाराजगी है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता छत्तीसगढ़ के 20335 गांवो में से 12123 गांव वनों पर आश्रित है। वहीं 9 हजार ग्राम पंचायतो के गांव 5 किमी की वन परिधि में आते हैं ।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि सरकार की नीतियों के विरोध में आदिवासियों को इन्हीं कारणों से पत्थरगड़ी करना पड़ा है। भाजपा सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जंगल सत्याग्रह प्रारंभ हो चुका है।

अब संगठित हुये आदिवासियों को दबाने के लिये उनके संवैधानिक अधिकारों की मांग को ही अलोकतांत्रिक बताकर अंग्रेजी हुकूमत की तरह सत्याग्रह को कुचलने में भाजपा की सरकार लगी हुयी है। अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आदिवासियों के जंगल सत्याग्रह में शामिल होकर जंगल में रहने वालों के साथ हो रहे अन्याय का विरोध करेंगे और सरकार से समाजिक न्याय दिलाने एवं जंगल में रहने वालों के हको को सुरक्षित रखने की आवाज बुलंद करेंगे।

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