छत्तीसगढ़

राहुल के सीतापुर दौर में छिपे हैं सियासत के बड़े मायने

आरएसएस के सर्वे में बीजेपी की बढ़त बताने पर कांगे्रस ने चला बड़ा दांव

रायपुर/अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग के बड़े दांव खेले जाने की तैयारी पूरी की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीजापुर दौरे के तत्काल बाद कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी सीतापुर के दौर पर आने वाले हैं। जिसकी तैयारी में कांग्रेस संगठन ने पूरी ताकत झोंक दी है।

भाजपा सामने मिशनरीज की चुनौती

बता दें कि सरगुजा संभाग की सीतापुर, लुड्रा, अंबिकापुर, सामरी सहित जशपुर जिले की बगीचा, जशपुर से लगे क्षेत्र में मिशनरी का काफी असर है, जो सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है। वहीं रायगढ़ जिले कई सीटों पर मिशनरी से जुड़े मतदाता चुनाव में जीत के लिए निर्णनायक भूमिका निभाते हैं। साफ है कि सीतापुर में राहुल का दौरा इसी मकसद से होना है। वहीं जशपुर में बीजेपी का चेहरा साबित होने वाले जशपुर कुमार दिलीप सिंहदेव की कमी भी इस बार भाजपा को खलेगी।

वनवासी कल्याण आश्रम सालों कर रहा है काम

सरगुजा, जशपुर, रायगढ़ के अंदरूनी इलाकों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुषांगिक संगठन वनवासी कल्याण आश्रम सालों से आदिवासी समाज के बीच अपने हिंदूवादी एजेंडा के तहत काम कर रहा है। इन संगठनों ने आदिवासी समाज के खासी पैठ भी बना ली है। अधर्मान्नातरित आदिवासी समाज के बीच संघ की विचारधारा को पहुंचाने में ये संगठन कामयाब रहे हैं । यही वजह है कि इन क्षेत्रों में बीजेपी का आधार भी बढ़ा है और ज्यादातर विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक जीतकर विधानसभा तक पहुंचे हैं।

बता दें कि सरगुजा जिले की ज्यादातर सीटों पर अबतक कांग्रेस के विधायक की जीत कर पहुंचे रहे हैं। कांग्रेस की कमान सरगुजा जिले में जहां सरगुजा राजपरिवार के पास रही वहीं जशपुर में कुमार दिलीप सिंहजूदेव की पकड़ की वजह से बीजेपी को जीत मिलती रही है। दोनों की राजपरिवार के अपने-अपने जनाधार हैं। इस बार इन्हीं राजपरिवार के सियासी चेहरे आमने-सामने होंगे।

कांग्रेस के गढ़ में सौदानसिंह की घेराबंदी के बाद बढ़ी थी उम्मीद

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद अविभाजित सरगुजा जिले की प्रतापपुर को छोड़ कर बाकी जिलों में कांग्रेस उम्मीदवार जीत कर विधानसभा पहुंचे थे, भाजपा की ओर से केवल गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ही जीत सके। इस बार भाजपा ने बस्तर और सरगुजा जिले में उन सीटों से अपना फोकस बढ़ा दिया था जहां पिछले चुनाव में हारजीत का अंतर 10 से कम वोटों का रहा है।

राहुल
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इसका असर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उस सर्वे में नजर में आया जिसमें सरगुजा संभाग की भाजपा की सीटों में बढ़त होने की गुजाइश बतलाई गई है। संघ और भाजपा की इसी सक्रियता पर ब्रेक लगाने में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का सीतापुर दौरा अहम साबित होने वाला है। यही वजह है कि कांग्रेस राहुल गांधी के सीतापुर दौरा में जुटने वाली भीड़ को वोटों में तब्दील करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है।

आपातकाल के दौर में सीतापुर का किला भेद नहीं पाया था जनसंघ

सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी का दौरा इस मायाने में खास है कि कांग्रेस के संगठन नेताओं को भरोसा है कि मिशनरी आबादी बाहुल्य वाले सीतापुर में भीड़ जुृटापाना आसान होगा दूसरा यह कि इस सीट पर कांग्रेस की पकड़ मजबूत तो होगी ही बल्कि सीतापुर से लगे जशपुर और रायगढ़ जिले में कांग्रेस मतदाताओं की बीच अपनी बात पहुंचाने में सफल होगी।

बता दें कि आपात काल के दौर में जब तात्कालीन मध्यप्प्रदेश में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया था तब भी यहां से कांग्रेस सुखीराम विधायक के तौर पर जीतकर विधानसभा तक पहुंचे थे। हालांकि निर्दलीय विधायक के तौर सीतापुर विधानसभा से प्रो. गोपाल राम ने यहां कांग्रेस को मात दी थी मगर वो भी यहां दोबारा चुनाव नहीं जीत सके। अब तक के विधानसभा में भाजपा यहां से केवल एक बार ही चुनाव जीत पाई है। वर्तमान में यहां से कांग्रेस के अमरजीत भगत लगातार तीसरी बार जीत कर विधायक चुने गए हैं।

भाजपा भी नहीं है अनजान

मिशनरी से जुडेÞ मतादाताओं की बड़ी आबादी वाले सीतापुर विधानसभा सीट पर राहुल गांधी के दौरे ने फिलहाल भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि भाजपा की तरफ जारी बयान में ये कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के प्रस्तावित दौर से कुछ ज्यादा असर नहीं होगा मगर अंदरूनी तौर भाजपा को इस दौरे के मायने समझ में आने लगे हैं वहीं कांग्रेस के इस सियासी दांव से भाजपा की बैचेनी बढ़ गई है।

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