PM मोदी को चुनौती देने के बाद पहली बार संसद में बोलेंगे राहुल

संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में मोदी सरकार

संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस को लेकर अब सब कुछ तय हो गया है. लोकसभा स्पीकर की ओर से सभी पार्टियों को उनकी संख्या के आधार पर समय बांट दिये गये हैं.

वहीं, बीजेपी ने भी अपनी ओर से लोकसभा में पार्टी की ओर से बोलने वाले वक्ताओं की लिस्ट जारी कर दी है. मगर आज लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान सबकी नजरें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण पर होगी. क्योंकि जब से उन्होंने मोदी सरकार से संसद में 15 मिनट बोलने का समय मांगा है, तब से यह पहली बार होगा जब राहुल गांधी लोकसभा में बोलेंगे. यानी पीएम मोदी को चुनौती देने के बाद यह पहला मौका होगा, जब राहुल गांधी संसद में बोलेंगे. राहुल गांधी का लोकसभा में संबोधन इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक मंचों से बार-बार कहा है कि जब वह संसद में 15 मिनट बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा.

दरअसल, आज लोकसभा स्पीकर ने जो कांग्रेस के लिए समय निर्धारित किया है, उसके हिसाब से यह स्पष्ट नजर आ रहा है कि आज राहुल गांधी को 15 मिनट तक बोलने का मौका मिल सकता है. क्योंकि लोकसभा में स्पीकर ने कांग्रेस को 38 मिनट का समय दिया है. यानी कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को माकूल समय मिलेगा अपनी बातें रखने के लिए और मोदी सरकार को घेरने के लिए. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार के कई फैसले को चुनौती देने वाला उनका भाषण तैयार है, लेकिन संसद में उन्हें बोलने से रोका जा रहा है. राहुल गांधी ने कहा था ‘अगर मुझे संसद में बोलने दिया गया तो भूकंप आ जाएगा.’

राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव के दौरान एक बार नहीं, बल्कि कई बार यह बात दोहराई थी कि उन्हें मोदी सरकार संसद में 15 मिनट बोलने का समय नहीं दे रही है. दरअसल, राहुल गांधी काफी समय से मोदी सरकार को जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी और कई विभिन्न मुद्दों पर घेरना चाह रहे हैं. इसकी बात वह कई मंचों से कई बार कर चुके हैं. हालांकि, राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान पर बीजेपी तंज भी कस चुकी है. राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान के बाद आज सबकी निगाहें इस बात पर टिकी है कि आज जब राहुल गांधी को समय मिलने वाला है, तो वह किस तरह से मोदी सरकार को घेरेंगे, जो सच में परिस्थितियां हैरान करने वाली होंगी.

हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू होने से पहले ही पीएम मोदी ने कहा है कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र के लिए अहम है. मगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी काफी अहम है. क्योंकि आज राहुल गांधी को संसद में बोलने का भरपूर मौका मिल रहा है. आज वह अपनी भाषण शैली से और जनहित के मुद्दों को सलीके से उठाकर अपनी राष्ट्रीय नेता की छवि को एक बार फिर से चकमा सकते हैं.

आम जनता के मुद्दों को, सरकार की नाकामियों को और सरकार की नीतियों और योजनाओं से संबंधित कई मुद्दों को उठाकर वह साबित कर सकते हैं कि विपक्ष के पास पीएम के रूप में एक बेहतर विकल्प भी हैं. मगर देखने वाली बात होगी कि आखिर राहुल गांधी अपने संबोधन में किन-किन बातों का जिक्र करते हैं और मोदी सरकार को घेरने में कौन-कौन से तुरूप के इक्कों का इस्तेमाल करते हैं.

बता दें कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है. अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस , बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को क्रमश: 29 मिनट, 27 मिनट, 15 मिनट और नौ मिनट का समय दिया गया है. सदन में बहुमत वाली सत्तारूढ़ भाजपा को चर्चा में तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है. लोकसभा में सीटों के आधार पर लोकसभा स्पीकर ने समय का निर्धारण किया है.

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