रायगढ़ : एमसीएच अस्पताल में कोविड मरीज महिला की मौत,3 घंटे डबल कोटिंग प्लास्टिक में कोई कैसे रह सकता है जिंदा..? जानिए इस मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी, पढ़ें पूरी खबर

100 बेड वाले मातृ शिशु अस्पताल में आज एक महिला की मृत्यु हो गई।

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़। कोरोना महामारी के इलाज के लिए बना जिले का एक बड़ा सरकारी अस्पताल एक बार फिर अपनी सुर्खियों में आया है। 100 बेड वाले मातृ शिशु अस्पताल में आज एक महिला की मृत्यु हो गई। लेकिन इसमें चौंकाने वाली बात यह है की सूचना मिलने के बाद जब परिजन वहां पहुंचे थे तो उन्होंने बताया कि उसकी सांसे चल रही थी। बल्कि इस बारे में डॉक्टरों का कहना है मरीज के मृत होने की पूरी जांच की गई थी। मरीज जीवित होने के कोई भी सबूत मौजूद नहीं थे। उनकी ईसीजी रिपोर्ट भी स्ट्रेट लाइन थी। उनके हृदय में कोई गतिविधि नहीं थी।

अभी तक की प्राप्त विश्वस्त जानकारी के अनुसार मृतक महिला का नाम चंद्रलाता नायडू था, वह केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड के पास की निवासी थी। उसकी उम्र 60 वर्ष थी। वे कोविड- पॉजिटिव थी। 12 दिन पहले उन्हें एमसीएच में भर्ती कराया गया था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी। आज सुबह उनकी मृत्यु हो गई। अस्पताल द्वारा मृतक के परिजन को सूचना दी गई। जिसके बाद मृतक के परिजन आए।

Raigad: Kovid patient dies in MCH hospital, how can anyone stay alive for 3 hours in double coating plastic ..? Know the full inside story of this matter, read the full newsबीएससी नर्सिंग की ट्रेनिंग

मृतक के परिजनों में एक बीएससी नर्सिंग की ट्रेनिंग छात्रा थी। जिसने स्क्रीनिंग के पास मृतक महिला की सील बॉडी को खोला। उस नर्सिंग छात्रा ने बताया कि उसकी आंखें झपक रही है और सांसे चल रही है। जिसके बाद वहां मौजूद परिजनों ने हंगामा किया। स्क्रीनिंग के पास की ग्लास तोड़ दी गई। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि कुछ लोग हाथ में डंडे लेकर अस्पताल के ऊपर जहां कोविड पेशेंट थे। डॉक्टरों को खोज रहे थे। उनके डर से कई डॉक्टर ने डॉक्टर होते हुए भी डॉक्टर ना होने की बात कही।

इस पूरे उपद्रव के बीच चक्रधर नगर पुलिस वहां पहुंची। जिसे देखकर कुछ लोगों उपर भागे, जहां कॉविड पेर्सेंट थे। जिन्हें पकड़ने के लिए जान की परवाह न करते हुए उपद्रव को रोकने पुलिसकर्मी भी ऊपर गए। चक्रधर नगर थाना प्रभारी अभिनव कांत सिंह भी मौके पर थे। उन्होंने परिजनों को समझाया। इसके बाद जिला कलेक्टर भी वहां पहुंचे। जहां उन्होंने डॉक्टरों से बात की और परिजनों को भी समझाया। उसके बाद मृतक महिला की लाश को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।

पूरे मामले में चक्रधर नगर थाना प्रभारी अभिनव कांत सिंह ने बताया कि उपद्रव को रोकने के लिए गए सभी पुलिस कर्मियों का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से अभी कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

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परिजनों का आरोप

हंगामे के एक सूचना मिलने के बाद हम वहां पहुंचे। जहां मृतका के परिजन व्यंकटेश राव ने बताया कि उसे 12 दिन पहले एमसीएच में भर्ती किया गया था। उस समय वे कोविड पॉजिटिव थी। 12 दिन बाद जांच के बाद उनकी रिपोर्ट नेगेटिव थी। सब कुछ सामान्य था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें आज डिस्चार्ज करने के लिए कहा गया था। आज सुबह 10:00 बजे करीब अस्पताल से फोन आया कि उनकी मृत्यु हो गई है। जिसके बाद परिजन अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल का टूटा हुआ कांड

वेंकटेश राव ने बताया कि जब परिजनों को उनकी लाश सौंपी गई। तब उनकी सांसे चल रही थी, हार्टबीट भी चल रही थी और पल्स भी बता रहा था। उन्हें ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। उन्होंने वहां उपस्थित एक डॉक्टर से पूछा। तो डॉक्टर ने साफ इंकार कर दिया। डॉक्टर ने कहा मैं यहां डॉक्टर नहीं हूं। नर्सों से पूछने पर नर्सों ने भी साफ इंकार कर दिया। हमें कोई मदद नहीं मिली।तोड़े गए स्क्रीन

सेंटर के ग्लास को दोबारा किया ठीक

परिजन ने बताया कि कोई मदद ना मिलने पर वह आक्रोश में आ गए। जिसके बाद दरवाजे के कुछ कांच टूटे। उसके बाद कार्यवाही के लिए पुलिस आई।

इलाज कर रहे डॉक्टरो के टीम लीडर ने बताया

इस बारे में वहाँ इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम लीडर डॉ आशुतोष शर्मा जो पीडियाट्रिक सर्जरी में सुपर स्पेशलिस्ट है। उन्होंने इस मामले में बताया कि महिला NRBM मे थी। उसे सांस लेने में नार्मल मरीजों से ज्यादा तकलीफ हो रही थी। उसकी स्थिति ज्यादा गंभीर थी। आज सुबह 6:00 बजे उसे सांस लेने में काफी परेशानी होने लगी। जिसके बाद मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने उसे दवाइयां दी। कुछ देर बार देखा गया कि वह सांस लेने के अंतिम स्टेज में थी, थोड़ी देर में ही उनका सांस लेना बंद हो गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे CPR किया। इमरजेंसी दवाइयां दी गई।

करीब 15 मिनट के बाद उनकी सास पूरी तरीके से रुक गई। उन्हें रिवाइव (पुनर्जीवित) ड्रग देने के बाद भी उनके हृदय में कोई एक्टिविटी नहीं थी। उनकी बॉडी में जीवित व्यक्ति के कोई भी सिम्टम्स नहीं थे, मृत व्यक्ति के जो सिम्टम्स होते हैं वे उनमें पाए गए। इसकी पूरी जांच की गई। इसके बाद उनकी ईसीजी रिपोर्ट ली गई। जिसमें उनके ह्रदय में कोई भी एक्टिविटी नहीं थी। ECG रिपोर्ट स्ट्रेट लाइन थी। पूरे संघर्ष के बाद जब हम उन्हें पुनर्जीवित नहीं कर पाए। तब 7:45 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया।

डॉ अरविंद का कहना

मामला क्योंकि काफी बड़ा था इसलिए इस मामले में हमने एमसीएच कोविड-19 अस्पताल डॉक्टर अरविंद मिंज से भी इस बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि सुबह 7:30 बजे के करीब महिला की मृत्यु हो गई थी। उनकी ईसीजी रिपोर्ट स्टेट लाइन थी। उनकी हार्ट बीट बंद हो गई थी। उन्होंने इस मामले में बताया कि वेंटिलेटर में रखी मरीज को ऑक्सीजन फोर्सली दी जाती हैं। हार्ट बीट बढ़ाने के लिए इमरजेंसी रिवाइव ड्रग भी दिया जाता है। इन दवाओं का असर काफी देर तक रहता है। जिसके कारण मौत होने के कई देर बाद तक फाल्स धड़कन भी होती हैं। असली जानकारी ईसीजी रिपोर्ट से मिलती है। उनकी ईसीजी रिपोर्ट स्टेट लाइन थी, धड़कन नील थी। जिसके बाद उन्हें डेथ घोषित किया गया।

पूरे मामले में कुछ सवाल

इस पूरे मामले में कई सवाल उभर कर सामने आते हैं। किसी भी कोविड-19 मरीज की मौत हो जाने के बाद से उसे आधे घंटे सेपरेट रखा जाता है। उसके बाद डबल प्लास्टिक से सील किया जाता है। मौत को काफी देर हो चुकी थी। इस दौरान डबल प्लास्टिक कोटेड में सांस कैसे चल सकती है?

लाश परिजनों को डायरेक्ट सौंपी नहीं जाती है। डायरेक्ट स्क्रीनिंग में जाकर किसी को भी कोविड पेर्सेंट की लाश को खोलना कितना खतरनाक हो सकता है और इसके बाद वहां की ग्लास को तोड़ देना..? यह काफी गंभीर मसला है, इसे संक्रमण फैलने का खतरा तो है..?

इस पूरे मामले में एक पॉइंट और निकलकर रहता है क्या किसी बीएससी नर्सिंग की ट्रेनिंग छात्रा के शंका के आधार पर एमबीबीएस डॉक्टरों की पूरी टीम को चुनौती दी जा सकती है..? कोविड-19 की मृत्यु के बाद पूरे डॉक्यूमेंटेंशन (कागजी कार्रवाई) अपना प्रोटोकॉल होता है। यह कई स्तरों से होकर जाता है। फाइनल ईसीजी रिपोर्ट के बाद ही मृत घोषित किया जाता है। ऐसे में किसी मृत के जीवित होने की संभावना कितनी हो सकती है? क्या किसी का भी ध्यान नहीं गया होगा..?

क्या अस्पताल वह भी कोविड जैसे गंभीर महामारी का इलाज जहां हो रहा हो, वहां इस तरह की तोड़फोड़ कितनी जायज है, हाथ में डंडा लेकर डर का माहौल बनाना। कॉविड पेशेंट की सीलबंद लाश को खोल देना.. और तोड़फोड़ वह भी स्क्रीनिंग सेंटर के पास..? सिर्फ शक के आधार पर सब को खतरे में डालना कहां तक उचित है..?

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