रायगढ़ : बाड़ी विकास से जुड़कर महिला समूह को मिल रही आर्थिक स्वावलंबन की राह

सुराजी ग्राम योजना अंतर्गत गौठानों में बाड़ी विकास के कार्य किये जा रहे हैं। यह ग्राम स्तर पर आजीविका संवर्धन और पोषण सुदृढ़ीकरण के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

रायगढ़, 7 जून 2021 : सुराजी ग्राम योजना अंतर्गत गौठानों में बाड़ी विकास के कार्य किये जा रहे हैं। यह ग्राम स्तर पर आजीविका संवर्धन और पोषण सुदृढ़ीकरण के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं। बाड़ी विकास से जुड़कर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं सब्जी तथा बागवानी फसलों का उत्पादन कर रही हैं। यह फसल उनके दैनिक उपयोग के साथ ही अतिरिक्त आय का जरिया भी बन रही है। जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वावलंबन को बढ़ावा मिल रहा है।

पुसौर विकास खण्ड के गौठान ग्राम सुपा के 0.8 हेक्टेयर भूमि पर बाड़ी विकास के तहत स्व- सहायता समूह की महिलाएं बागवानी व सब्जी उगा रही हैं। 14 स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मिलकर यह काम कर रही है। गौठान अंतर्गत बाड़ी विकास कार्य मे स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 0.8 हेक्टेयर भूमि में अपनी रुचि के अनुसार बागवानी फसल प्याज, लाल भाजी, पालक भाजी, मूली, बीन्स, भिंडी, मक्का आदि फसलों का उत्पादन किया था। अभी समूह की महिलाओं के द्वारा 0.6 हेक्टेयर जमीन में प्याज की खेती की गई थी। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में 57.50 क्विंटल प्याज का कुल उत्पादन प्राप्त हुआ था।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि बाड़ी विकास के अंतर्गत सब्जी उत्पादन से न केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां आसानी से अब यहां उपलब्ध हो रही हैं। बल्कि इसके विक्रय से आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। सभी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपनी इस सफलता में बिहान की टीम और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।

उल्लेखनीय है कि परिवार के दैनिक उपयोग हेतु तथा कुपोषण को दूर करने के लिए एवं अतिरिक्त आमदनी के स्रोत का सृजन कर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निवास स्थान के समीप उपलब्ध भूमि पर फल, सब्जी एवं पुष्प की खेती किया जाना ही सुराजी गांव योजना अंतर्गत बाड़ी की परिकल्पना का मुख्य आधार हैं। योजनान्तर्गत महिलाओं महिला स्व-सहायता समूह को चिन्हित कर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा हैं। बाड़ी से ग्रामीण परिवारों के अतिरिक्त आय में वृद्धि हो रही है तथा उनका भोजन संतुलित हो रहा है ।

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