छत्तीसगढ़

रेल नीर के बदले में बिक रहे है दूसरी कंपनियों के पानी बोतल

अंकित राजपूत :

बिलासपुर –

ट्रेनों में जांच ठंडी पड़ी है। इसका फायदा पेंट्रीकार के कर्मचारी उठा रहे हैं। उनके द्वारा रेलनीर नहीं बेचा जा रहा है। इसके अलावा पेंट्रीकार को भी साफ- सुथरा नहीं रखते हैं। हावड़ा- अहमदाबाद एक्सप्रेस जोनल स्टेशन से इसी स्थिति में गुजरी। पेंट्रीकार का कर्मचारी बेधड़क दूसरे ब्रांड का पानी बेच रहा था। इसके अलावा पेंट्रीकार में खाने- पीने का सामान खुले में रखा था। चारों ओर गंदगी भी पसरी हुई थी।

रेलवे बोर्ड खानपान की क्वालिटी सुधारने के लिए चाहे जितने निर्देश जारी करें। हकीकत यह है कि इसमें जरा भी सुधार नहीं हो रहा है। आदेश के बाद भले ही रेलवे व आइआरसीटीसी कुछ दिन का अभियान चलाकर खानापूर्ति कर देते हैं। इसके बाद पेंट्रकार या ट्रेन को झांककर देखने तक फुर्सत नहीं रहती।

वर्तमान में स्टाल हो या पेंट्रीकार सभी को रेलनीर ही रखने का सख्त आदेश है। यदि कोई नहीं रखता है तो दूसरे ब्रांड का पानी जब्त कर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी है। साथ ही रेलनीर भी उपलब्ध कराना है। कुछ महीने पहले जोनल स्टेशन में आइआरसीटीसी ने लगातार इस तरह की कार्रवाई की।

इसके बाद काफी कुछ सुधार आ गया था। लेकिन अब वे किसी भी ट्रेन की जांच नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि हावड़ा- अहमदाबाद एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में गंदगी पसरी हुई थी। इसकी हालत देखने से नहीं लगा कि कभी इसकी सफाई होती होगी। इसी स्थिति में चावल, दाल व सब्जी रखी हुई थी।

यह लापरवाही यात्रियों की सेहत बिगाड़ सकती है। इसी तरह कोच में पेंट्रीकार के कर्मचारी सामान बेच रहे थे। लेकिन उनके पास रेलनीर ही नहीं था। कुछ यात्रियों ने इसकी मांग की तो उन्हें साफ यह कह दिया गया कि यही पानी मिलेगा, अगर लेना है तो लो।

यात्रियों की मजबूरी थी इसलिए उन्होंने दूसरे ब्रांड का पानी ही खरीदा। यही स्थिति दूसरे ट्रेनों की है। हरिद्वार- पुरी उत्कल एक्सप्रेस में एक यात्री ने जोनल स्टेशन में उतरने के बाद गंदगी की शिकायत रेल प्रशासन से की। लेकिन इसमें किसी तरह कार्रवाई नहीं हुई और न ही सफाई कराई गई।

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