लगातार जारी रहेगा इन राज्यों में बारिश

सड़क से लेकर रेल की पटरी तक बाढ़ के पानी में डूबी हुई।

नई दिल्ली: उत्तर से दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक मॉनसून की बारिश के बाद अब सैलाब कहर ढा रहा है। शहर के शहर सैलाब के पानी में डूबे हुए हैं। सड़क से लेकर रेल की पटरी तक बाढ़ के पानी में डूबी हुई।

मध्य प्रदेश के सागर में तो इतना पानी आ गया कि रेलवे स्टेशन से लेकर रेलवे ट्रैक भी पानी से लबालब भर गया और उसी डूबे ट्रैक पर सैलाब को चीरकर गुजर रही हैं।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तरखंड समेत उत्तर भारत में मंगलवार को बारिश जारी रह सकती है। वहीं, मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाकों में मंगलवार को भारी वर्षा होने की संभावना है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में सोमवार को बारिश हुई।

मौसम पूर्वानुमानकर्ता स्काइमेट ने भी संभावना जताई है कि अगले 24 घंटों के दौरान, मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की उम्मीद है। एक दो स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है पूर्व राजस्थान, गुजरात के कुछ हिस्सों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा के कुछ हिस्सों, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश, कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

स्काइमेट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान, पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हुई। विदर्भ, छत्तीसगढ़, झारखंड ओडिशा, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश हल्की से माध्यम के बीच थी.

एक दो स्थानों पर भारी वर्षा भी हुई गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश के हिस्सों और बिहार और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

स्काइमेट ने बताया कि उत्तर-पश्चिम झारखंड और आसपास के क्षेत्र में वायु-दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। इस प्रणाली की पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में जाने की उम्मीद है और धीरे-धीरे यह गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा।

मानसून की अक्षीय रेखा उत्तर-पश्चिम राजस्थान, दक्षिण हरियाणा, उत्तर मध्य प्रदेश, और फिर बंगाल की पूर्वी केंद्रीय खाड़ी के माध्यम से गुजर रही है। दक्षिण हरियाणा में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।

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