रायपुर: डिप्टी रेंजर और ठेकेदार के जुगलबंदी से जंगल सफारी में करोड़ों का घोटाला

रायपुर. 2011 से अटल नगर नवा रायपुर में लगभग 1200 एकड़ के वृह्द भूभाग में मानव निर्मित जंगल सफारी का निर्माण विभाग के द्वारा किया जा रहा है जिसमे सैकड़ों मजदूर दस वर्षों से ऊपर अपनी सेवाएं देते आ रहे है जिसमे कुछ श्रमिक की ड्यूटी के दौरान मृत्यु भी हुई थी जिन्हें मुआवजे के नाम पर अब तक कुछ हासिल नही हुआ उल्टे ऐसे श्रमिकों का आर्थिक मानसिक और शारीरिक दोहन भी प्रारंभ हो गया जो बड़ी निष्ठा से अपने खून पसीने से सींच कर मानव निर्मित जंगल सफारी में अपना महती योगदान दिया आज ऐसे श्रमिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को जिनके पास सुरक्षा श्रमिक का कार्ड भी है उन्हें दरकिनार करके ऐसे कर्मचारियों को ड्यूटी पर रख लिया गया है.

जो अफसर एवं नेताओ के सिफारिश पर यहां अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे है यही नही ऐसे सुरक्षा श्रमिकों के छ माह के वेतन पर भी डाका डाल दिया गया वेतन मांगे जाने पर अधिकारी उन्हें उल्टा कार्य से बाहर कर अपने मन मुताबिक श्रमिकों को अधिक तवज्जो दे रहे है जिसकी वजह से अब ऐसे सुरक्षा श्रमिक अपने अधिकार एवं पारिश्रमिक के लिए अनेक उच्च अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर अपनी व्यथा बता चुके है परन्तु ऐसे गड़बड़ घोटाला कर अपनी जेब गरम करने वाले संलिप्त अधिकारी श्रमिकों को दो टूक में में जवाब देकर… तुम्हे जो करना है करो…कह कर उन्हें कार्य से बाहर कर आर्थिक एवं मानसिक रूप से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है ऐसे पीड़ित श्रमिक की संख्या एक दो नही बल्कि सैकड़ों है जिनका शोषण कर अधिकारियों के द्वारा छ माह का वेतन गबन कर डकार लिया गया है.

तथा इन्हें बाहर का रास्ता दिखा उनके पैसों से सुख एवं विलासता पूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे है जिनमे एक अदना सा विभागीय कर्मचारी भी दो पहिया चार पहिया गाड़ी से लेकर आलीशान बंगले का मालिक बन चुका है इस संदर्भ में जंगल सफारी के रेंजर प्रभारी नदीम कृष्ण बरिहा से मोबाइल से संपर्क करने का प्रयास कर जब उनसे वस्तुस्थिति ज्ञात करने का प्रयास किया गया तब उनके द्वारा मोबाइल नही उठाया गया वही डिप्टी रेंजर एवं ज़ू प्रभारी सुनील कुमार खोपरागड़े भी सफारी में उपस्थित नही थे जबकि पीड़ित श्रमिको द्वारा बताया गया कि डिप्टी सुनील खोपरागड़े द्वारा निर्माण कार्यों में बड़ी गड़बड़ी कर लाखों करोड़ों की राशि की अफरा तफरी कर चुका है तथा उसके द्वारा ही श्रमिकों के शोषण करने के संदर्भ में यह गड़बड़ी घोटाला किए जाने की बात सामने आ रही है

बताते चले कि इसी वर्ष 2021 में जंगल सफारी ज़ू में अतिरिक्त बाड़ा निर्माण हेतु लगभग बारह करोड की राशि प्राप्त हुई थी जिसके माध्यम से भीतर के हो रहे निर्माण कार्य को देखकर यह कतई नही लगता है कि यहां बारह करोड की बड़ी राशि व्यय की जा रही है क्योंकि जिस प्रकार जंगल सफारी जू में हो रहे निर्माण कार्य का मौका स्थल पर जाकर निरिक्षण किया गया तो होश फाख्ता हो गए जिनमे दो शौचालय,दो कक्ष, दो डायनिंग रुम 8 बाड़ा, ही निर्माण किए गए है बाड़े मे लोहे के रॉड में लिंकिंग चैन के माध्यम से पांच हजार से दस हजार फीट की परिधि को फेंसिंग किया गया है तथा वन्य प्राणियों के रखने हेतु गुफा निर्माण किए जा रहे है.

निर्माण कार्य मे भुरभुरे काले ईट की जुड़ाई तथा कुछ ब्लॉक में जिनमे सरीसृप प्राणियों के रहवास हेतु कांच लगाए जा रहे है इस प्रकार संपूर्ण ज़ू क्षेत्र में कुल 11 बाड़ा एवं निर्माण कार्य संपादित किए जा रहे है जिसके लिए बारह करोड़ की राशि व्यय की जा रही है अर्थात प्रत्येक निर्माण कार्य हेतु एक करोड़ दस लाख की राशि व्यय की जा रही है जबकि सांप कक्ष बनाए जाने हेतु एक वर्ष पूर्व से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है जिसके स्तरहीन,अमानक होने की स्थिति मे सरि सृप कक्ष की छत को खंडित किया गया तो कभी दीवार मजबूती के हिसाब से दो बार खंडित किया जा चुका है बताया जाता है कि कभी छत के मध्य मे बीम नही डाला गया तो कभी कक्ष की परिधि बड़ी होने की स्थिति मे मध्य से दीवार उठाई गई इस प्रकार बार बार कक्ष का पुनरुद्धार किया जाता रहा तथा शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जाता रहा है फिर भी अब तक सरीसृप कक्ष निर्माण नही किया जा सका है

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