रायपुर भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल, प्रदूषण का नहीं हो रहा निराकरण

सड़क चौड़ीकरण समेत अन्य विकास कार्यों के नाम पर हजारों पेड़ काटे गए

रायपुर :

रायपुर विश्व के टॉप 15 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है। जिस प्रकार रायपुर में रियल स्टेट, कंस्ट्रक्शन का कारोबार तेजी से बढ़ा है। इस हिसाब से देखा जाए तो राजधानी रायपुर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर रोकथाम जरूरी है।

शहर के चारों तरफ उरला, सांकरा, गोगांव, सोनडोंगरी, सिलतरा और मंदिर हसौद औद्योगिक इलाके हैं। करीब 12 लाख वाहन दौड़ रहे हैं, दीवाली में हजारों वाहनों की बुकिंग हो चुकी है। सड़क चौड़ीकरण समेत अन्य विकास कार्यों के नाम पर हजारों पेड़ काट दिए गए।

इन्हीं सब वजहों से यहां प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। स्थिति यह हो गई कि रायपुर विश्व के टॉप 15 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया, लेकिन इसके बाद अप्रत्याशित निर्णय लिया गए और साम-दाम-दंडभेद की नीति से स्थिति नियंत्रित में आ चुकी है।

शहर में पीएम10 का स्तर 100 रखा गया है, जो वर्तमान 44.364 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक है। वहीं पीएम 2.5, 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक तक पर्मिसेबल है, जो वर्तमान में 28.379 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक है।

अब दीपावली आने वाली है। सालभर इस त्यौहार का सभी को इंतजार रहता है। करोड़ों के पटाखे फोड़े जाते हैं। लाखों दीये जलते हैं। बड़ी संख्या में गाड़ियां दौड़ती हैं। अब यह हम सब शहरवासियों की जिम्मेदारी है कि प्रदूषण के स्तर को निर्धारित पैरामीटर (मानक) के अंदर रखने में सहयोग दें।

बतां दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राज्य शासन ने दीपावली की रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़ने के आदेश जारी किए हैं। सीरीज (लड़ियों वाले) पटाखों पर प्रतिबंध है। 125 डेसीबल के पटाखे दुकानों से जब्त किए जा रहे हैं।

पर्यावरण प्रदूषण की वर्तमानिति-

मई में जारी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक

शहर की वायु गुणवत्ता में 2.5 पीएम (फाइन पर्टिकुलेट मैटर) का वार्षिक औसत वर्ष 2016 में 37.13 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो वर्ष 2017 में 33.55 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर,वर्ष 2018 में माह अप्रैल तक का औसत 34.65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।

प्रदूषण नियंत्रण में हुए अब तक ये प्रयास

प्रदूषण के कलंक को धोने के लिए रायपुर की सभी रोलिंग मिलों में कन्टिन्यूअस ऑनलाईन स्टेक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए। सभी प्रमुख उद्योगों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगे। पूरे रायपुर को ग्रिड में बांटकर मॉनिटरिंग की जा रही है। उद्योगों में एसओपी के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

यह है प्रदूषण के मापदंड

पीएम10- हवा में मौजूद महीन कणों को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर यानी आरएसपीएम या पीएम कहते हैं। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर होता है। कण ठोस, तरल रूप में वातावरण में होते हैं। धूल, गर्द व धातु के सूक्ष्म कण शामिल हैं। इसकी मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

वर्तमान स्थिति

पीएम 2.5- एसओ-2 (सल्फर डाइऑक्साइड) और एनओ- 2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) आबोहवा में जहर घोल देता है। उद्योगों की भट्टयिों में जलाने वाला पेटकॉक और फर्नेस ऑयल इसका मुख्य स्रोत है। वाहनों में जलने वाले पेट्रोल-डीजल की वजह से भी हवा में इनकी मात्रा बढ़ती है। स्थिति संभली है।

वर्तमान स्थिति-

सभी के सहयोग से बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर नियंत्रण हो पाया है। इसके लिए कुछ सख्ती भी करनी पड़ी, यह जारी भी है। दीपावली पर स्वाभाविक है कि प्रदूषण अभी जिस स्तर पर है, उसमें इजाफा होगा। लोगों से अपील है कि वे निर्धारित समय में ही पटाखे फोड़ें। – अमर प्रकाश सावंत, पीआरओ, पर्यावरण संरक्षण मंडल

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