रायपुर: मोहम्मद सिराज के हत्यारें चढ़े पुलिस के हत्थे, एक और हत्या की थी साजिश

तब शादिक के कहने पर सिराज ने मुजाहिद रजा को यूसुफ कबाड़ी के मौदहापारा स्थित यार्ड में निजी काम के बहाने बुलाया था।

मौदहापारा के कबाड़ी मोहम्मद सिराज का अपहरण कर तेंदुआ के सूनसान इलाके में हथौड़े से सिर पर वार कर उसकी हत्या करने वाला मोहम्मद मुजाहिद रजा के निशाने पर एक और कबाड़ी था।

दरअसल वारदात से ठीक तीन दिन पहले वाहनों की खरीद-बिक्री का काम करने वाले शादिक को रजा से डेढ़ लाख रुपये लेने थे। रजा रकम देने में आनाकानी कर रहा था।

तब शादिक के कहने पर सिराज ने मुजाहिद रजा को यूसुफ कबाड़ी के मौदहापारा स्थित यार्ड में निजी काम के बहाने बुलाया था।

वहां पर पैसे को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि शादिक ने डंडे से मुजाहिद रजा की पिटाई कर दी थी। वहां पर रजा का पुराना पार्टनर मृतक सिराज भी मौजूद था।

हालांकि उसी ने बीच-बचाव कर यह कहकर विवाद खत्म कराया कि वह गारंटी लेता है कि रजा पैसे लौटा देगा। शादिक और यूसुफ तब मान गए।

यार्ड से निकलते ही रजा ने ठान लिया था कि वह शादिक से पिटाई का बदला लेगा। उसे शक ही नहीं, पूरा यकीन था कि सिराज को मालूम था कि यार्ड में शादिक उसकी पिटाई करेगा।

इसके बावजूद उसने निजी काम का बहाना बनाकर यूसुफ के यार्ड में बुलाकर पिटाई करा दी। लिहाजा सिराज की हत्या की योजना उसी दिन बना ली थी।

वाहनों की खरीद-बिक्री का काम करने वाले शादिक को रजा से डेढ़ लाख रुपये लेने थे। रजा पैसे देने से इंकार कर छुपाता फिर रहा था।

जानकार सूत्रों का दावा है कि मुजाहिद रजा अगर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता तो सिराज के बाद उसका अगला निशाना शादिक होता।

हालांकि पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने इस बात से साफ इंकार किया है। वहीं एसपी नीथू कमल ने कहा कि सिराज से तीन लाख रुपये लूटने के इरादे से रजा व नीटू ने उसकी हत्या सोमवार रात को ही कर दी थी।

ग्वालियर पुलिस की मदद से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से पंजाब भाग रहे मो.मुजाहिद रजा और मजिंदर सिंह उर्फ नीटू को पकड़ा जा सका। गुरुवार की आधी रात को आरोपितों को रायपुर लाया गया।

एसपी ने कहा कि सिराज को रजा ने एक कंडम ट्रक की सौदेबाजी करने के लिए तीन लाख लेकर टाटीबंध गुरुद्वारा के पास बुलाया।

वहीं पर सिराज की एक्टीवा खड़ी कराकर उसे अपनी नैनो कार में बैठाकर दोनों ट्रक दिखाने के बहाने ग्राम तेंदुआ की तरफ ले गए।

वहां निर्माणाधीन पुल के पास गाड़ी रोककर हथौड़े से सिराज के सिर में ताबड़तोड़ कई वार कर दिया। इससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

शव को पुल के नीचे फेंककर दोनों आरडीए कॉलोनी हीरापुर और वीर सावरकरनगर स्थित घर से कपड़े, बैग लेकर तत्काल भाग निकले।

बताया गया कि सिराज को जब चोरी के ट्रक की सौदेबाजी की जानकारी लगी तो उसने रजा को खूब बुरा-भला कहा। इससे रजा काफी नाराज हो गया था।

घटना स्थल पर आरोपियों को घुमाया

शुक्रवार दोपहर में पुलिस टीम आरोपियों को घटना स्थल पर लेकर गई। वहां पर कब, कैसे सिराज को लेकर गए। कैसे मारा और शव को फेंका बाकायदा घटना की पुनरावृत्ति कराई।

पुलिस को गुमराह करने सिराज के मोबाइल को आरोपियों ने गोंदवारा की नहर रोड के पास फेंक दिया था।

घटना में इस्तेमाल रजा की नैनो कार व सिराज से लूटे गए करीब तीन लाख रुपये में से पुलिस ने 72 हजार रुपये के साथ फेंका गया मोबाइल फोन, एक्टीवा बरामद कर लिया।

मृतक मो.सिराज के लापता होने के बाद जब पुलिस तफ्तीश में जुटी तो पता चला कि अंतिम बार मुजाहिद रजा एवं मजिंदर सिंह उर्फ नीटू के साथ नैनो कार में हीरापुर से तेंदुआ जाते हुए कुछ लोगों ने देखा था।

इसकी जानकारी मिलते ही दोनों की पतासाजी शुरू की गई। पुलिस के सक्रिय होने की भनक पाकर दोनों स्टेशन से अमृतसर (पंजाब) के लिए टिकट लेकर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की एस-9 बोगी में बैठे। ग्वालियर पहुंचते ही आरोपियों को दबोच लिया गया।

तीन महीने से कबाड़ के धंधे में वचर्स्व जमाने की होड़

मूलतः उप्र के आजमगढ़ का रहने वाला मो.मुजाहिद रजा करीब साल भर पहले ही रायपुर में आकर कबाड़ का धंधा करने लगा था।

वह चोरी किए गए ट्रक व अन्य वाहनों को काटकर खपाने का काम कर रहा था। तीन महीने पहले सिराज (मृतक) के संपर्क में आया।

चूंकि सिराज भी कबाड़ का काम कर रहा था, इसलिए उसने रजा के साथ पार्टनरशिप में कई कंडम वाहनों की खरीद-बिक्री की।

बताया जा रहा है कि पैसे के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच विवाद व मनमुटाव हो गया था। इसके बाद से वे अलग होकर काम करने लगे।

जिस कंडम ट्रक की सौदेबाजी करने रजा ने सिराज को बुलाया था। रजा चोरी के ट्रक खपाने में माहिर था। कुछ दिन पहले चोरी के ट्रक को काटकर उरला के एक कबाड़ी को बेच दिया था।

पुलिस को जब इसकी भनक लगी तो यार्ड में छापा मारा गया, जहां से केवल ट्रक का इंजन ही मिल पाया।

हकीकत से दूर पुलिस की कहानी

सिराज हत्याकांड का खुलासा करते हुए एसपी नीथू कमल ने मीडिया के सामने जो हकीकत बयां की, दरअसल वह असली कहानी से काफी परे लग रही है।

उन्होंने बताया कि ट्रेन से आरोपियों के फरार होने की जानकारी रजा की पत्नी से मिली थी। उसने बताया कि वह काफी हड़बड़ी में घर आकर कपड़े लेकर निकला है।

काफी घबराया हुआ था। तब पुलिस ने रायपुर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे को खंगाला। वहां से फुटेज मिलने पर साफ हुआ कि दोनों छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से निकले हैं।

रजा के मोबाइल का अंतिम लोकेशन दोपहर तीन बजकर 52 मिनट में डोंगरगढ़ के आसपास होने का दावा पुलिस ने किया, जबकि छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस रायपुर स्टेशन से शाम चार बजकर 10 मिनट पहुंचकर 4.20 बजे छूटती है।

डोंगरगढ़ पहुंचने में करीब तीन घंटे का समय लगता है। ऐसे में इस ट्रेन से आरोपियों के भागने के दावे को लेकर भी शक है।

अलग-अलग कबाड़ियों के लिए काम करते थे

जानकार सूत्रों ने बताया कि मृतक मो.सिराज और आरोपी मो.मुजाहिद रजा अलग-अलग कबाड़ियों के लिए काम करते थे।
सिराज जहां गुड्डू कबाड़ी के लिए कंडम गाड़ियों का लेन-देन करता था, वहीं रजा मौदहापारा के यूसुफ कबाड़ी का धंधा देखता था।

रजा कबाड़ के धंधे में नया होते हुए भी अपना दबदबा तेजी से बना रहा था। यह अन्य बड़े कबाड़ियों को नागवार गुजरती थी।

कई कबाड़ियों से रजा का इसी के चलते विवाद भी हो चुका था। रजा की आपराधिक प्रवृत्ति होने के कारण उससे कोई जल्दी विवाद नहीं करता था।

आरोपी एक दिन के रिमांड पर

पुलिस ने सिराज हत्याकांड के दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ करने के लिए शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर एक दिन पुलिस रिमांड मांगा जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

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