राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर, बीजेपी करेगी अर्धपन्ना प्रमुख नियुक्त

नई दिल्ली : चुनाव से पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर और कांग्रेस के पक्ष में आ रहे संकेतों ने बीजेपी नेताओं के सिर पर बल ला दिए हैं। शायद यही वजह है कि बीजेपी फिर से अपनी सबसे बड़ी ताकत बूथ मैनेजमेंट पर भरोसा जता रही है। पार्टी ने पन्ना प्रमुख से एक कदम आगे बढ़ते हुए राजस्थान में अर्ध पन्ना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला लिया है।

बता दें कि वोटर लिस्ट के हर पन्ने पर आगे और पीछे दोनों ही तरफ नाम लिखे होते हैं। भाजपा अब इन पन्नों के हर तरफ की जिम्मेदारी के लिए अर्ध पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति करेगी। इससे काम आसान हो जाएगा और हर वोटर तक पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। भाजपा ने ये रणनीति इससे पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तर पूर्वी राज्यों में भी इस्तेमाल की थी और इसके नतीजे भी बीजेपी के पक्ष में आए हैं।

भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि पन्ना प्रमुख रणनीति उन राज्यों में ज्यादा कारगर साबित होती है, जहां भाजपा विरोधी लहर चल रही हो। इसलिए पार्टी को इस रणनीति पर भरोसा है। वहीं बीजेपी ने राज्य में 4.3 करोड़ केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को बी चिन्हिंत किया है और अर्ध पन्ना प्रमुख इन लाभार्थियों पर विशेषतया ध्यान केंद्रित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि पन्ना प्रमुख का विचार भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अमित शाह की देन है। दरअसल, हर विधानसभा क्षेत्र में कई बूथ होते हैं और हर पोलिंग की अपनी एक वोटर लिस्ट होती है। इस वोटर लिस्ट में कई पन्ने होते हैं। विचार ये कि वोटर लिस्ट के हर पेज के वोटरों को मनाने की जिम्मेदारी भाजपा के किसी कार्यकर्ता को दी जाए। इसी को पन्ना प्रमुख कहते हैं।

पन्ना प्रमुखों की ये जिम्मेदारी होती है कि वे अपने हर वोटर के संपर्क में रहें और वोटिंग से पहले पार्टी के हर संदेश को उन लोगों तक पहुंचाते रहें। वोटिंग के दिन पन्ना प्रमुख ये सुनिश्चित करते हैं कि उनके पेज से जुड़े सभी लोगों को पोलिंग बूथ तक पहुंचने में कोई समस्या न हो। ये बेहत कठिन काम है और इसका प्रबंधन करना आसान काम नहीं है। लेकिन ये बीजेपी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ और अब पार्टी इसे हर चुनाव में प्रयोग करती है।

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