राष्ट्रीय

राजस्‍थान विधानसभा चुनाव:PAK में गुजारी आधी जिंदगी, अब जयपुर में करेंगे मतदान

69 वर्षीय गजानंद शर्मा कुछ माह पहले ही पाकिस्‍तान से वापस आए

नई दिल्‍ली: अपनी आधी से ज्‍यादा जिंदगी पाकिस्‍तान में गुजारने वाले गजानंद शर्मा 38 साल बाद अपने मताधिकार का प्रयोग जयपुर में करने जा रहे हैं. जयपुर के माउंट रोड स्थिति फतेहराम का टीबा में रहने वाले 69 वर्षीय गजानंद शर्मा कुछ माह पहले ही पाकिस्‍तान से वापस आए हैं.

वतन वापसी के बाद गजानंद शर्मा ने सबसे पहले अपना आधार कार्ड बनवाया, फिर लोकतंत्र में सहभागी बनने के लिए उन्‍होंने अपने वोटर आई-कार्ड का आवेदन दिया. सोमवार को चुनाव आयोग ने गजानंद को उनका वोटर आई-कार्ड सौंप दिया है.

अब 7 दिसंबर को राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए होने वाले मतदान में वह भी अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. 1982 में अचानक घर से लापता हो गए थे गजानंद शर्मा 1982 में गजानंद अपने परिवार के साथ अमृतसर के महारकलां गांव में रहते थे.

1982 की एक रात गजानंद शर्मा अचानक अपने घर से लापता हो गए थे. लंबे समय तक उनका कुछ पता न चलने पर परिवार ने मान लिया था कि गजानंद अब इस दुनिया में नहीं रहे.

जिसके बाद गजानंद के परिवार ने अमृतसर छोड़ दिया और जयपुर में आकर रहने लगे. गजानंद की पत्‍नी मखनी देवी बीते 36 सालों से विधवा की जिंदगी गुजार रही थीं.

7 मई को सामेदा थाना पुलिस मखनी देवी के घर पहुंची और गजानंद के बारे में पूछताछ करने लगी. पुलिस की पूछताछ से इस परिवार को पता चला कि गजानंद न केवल जिंदा हैं बल्कि वह पाकिस्‍तान की लाहौर सेंट्रल जेल में बंद हैं.

13 अगस्‍त को गजानंद की हुई पाकिस्‍तान से वतन वापसी
गजानंद के परिवार से मिले दस्‍तावेजों की पड़ताल करने के बाद सामेदा थाना पुलिस ने इस बाबत विदेश मंत्रालय को सूचित किया. जिसके बाद गृह मंत्रालय ने गजानंद की वतन वापसी के प्रयास शुरू कर दिए.

4 महीने की कवायद के बाद गजानंद के परिवार और विदेश मंत्रालय की मेहनत रंग लाई.

13 अगस्‍त 2018 को गजानंद बाघा बार्डर के रास्‍ते पाकिस्‍तान से भारत वापस आ गए. हालांकि अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं हो सका है कि गजानंद किन परिस्थितियों में भारत की सीमा पार कर पाकिस्‍तान पहुंच गए थे.

अब तक सिर्फ इतना ही साफ हुआ है कि पाकिस्‍तान पहुंचने के बाद स्‍थानीय पुलिस ने गजानंद को गिरफ्तार कर लिया था.

पाक कोर्ट से मिली 2 माह की सजा, जेल में गुजारे 36 साल
गजानंद बताते हैं कि पाकिस्‍तान पुलिस ने उन्‍हें गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश किया. कोर्ट ने 2 माह की सजा देकर उन्‍हें जेल भेज दिया.

यह बात दीगर है कि 2 माह की सजा खत्‍म होने के बावजूद उन्‍हें जेल से रिहा नहीं किया गया. उनको अपनी रिहाई के लिए 36 साल लंबा इंतजार करना पड़ा. उन्‍होंने बताया कि उनकी पत्‍नी मखनी के प्रयासों का नतीजा है कि उनकी वतन वापसी हो सकी है.

अब, उनकी बाकी बची हुई पूरी जिंदगी पर सिर्फ उनकी पत्‍नी का ही अधिकार है. भविष्‍य में वह वही करेंगे जो उनकी पत्‍नी उनसे कहेगी. मेरी पत्‍नी जिसे कहेगी, उसको ही दूंगा अपना वोट विधानसभा चुनाव में मतदान को लेकर उनका कहना है कि अब उनकी पत्‍नी ही उनकी सरकार हैं. उनकी पत्‍नी जिसे कहेगी,

वह उसी को अपना वोट देंगे. उन्‍होंने बताया कि उन्‍होंने अपना पहला मताधिकार का प्रयोग 1980 में ब्‍यावर में किया था. उस समय एक कागज पर सभी प्रत्‍याशियों के नाम और चुनाव चिन्‍ह छपे होते थे. हम अपने पसंदीदा प्रत्‍याशी के चिनाव चिन्‍ह पर मोहर लगाकर कागज को एक बक्‍से में डाल देते थे.

36 साल तक लाहौर जेल में होने के चलते वह दुनिया से पूरी तरह कटे हुए थे. उनकी पत्‍नी ने उन्‍हें बताया है कि अब सिर्फ बटन दबाने से वोट पड़ जाता है. उन्‍होंने कहा कि मैं 38 साल के बाद अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहा हूं. मतदान को लेकर मैं बहुत उत्‍साहित हूं. 7 दिसंबर को वह अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करेंगे.

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