इन गांवों के लड़के कुवांरे रहने को हैं मजबूर

जैसलमेर. डेजर्ट नैशनल पार्क (डीएनपी) से सटे गांवों के युवकों को शायद अभी कुछ और सालों तक कुवांरा रहना पड़ सकता है। बहुत से लोग अपनी बेटियों की शादी इस इलाके के गांवों में रह रहे युवकों से नहीं करना चाहते। इसलिए इन गांवो में कुवारें युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि ये गांव विकास के मामले में आज भी बहुत पिछड़े हुए हैं। यहां यातायात, शिक्षा, स्वास्थ संबंधी सुविधाएं बिल्कुल ही नदारद हैं। सड़क न होने के कारण यहां के लोग आज भी बैल गाड़ी से चलने को मजबूर हैं। इन मूलभूत सुविधाओं के न होने के कारण ही लोग अपनी बेटियों की शादी इस इलाके में नहीं करना चाहते हैं।

इस समस्या को बहुत बार विधानसभा में उठाया है

इस क्षेत्र के विकास को लेकर एक प्लान पहले ही सरकार को दिया जा चुका है। यहां के एमएलए छोटू सिंह भाटी ने भी इस समस्या को बहुत बार विधानसभा में उठाया है। हालांकि, अभी तक किसी प्लान को मंजूरी नहीं मिली है। इस मुद्दे पर एमएलए भाटी ने कहा कि यहां के दर्जनों गांवों की हालत दयनीय है। करीब 36 गांवों में यहां सड़क नहीं है। इन समस्याओं को देखते हुए मैंने यह मुद्दा कई बार असेंबली में उठाया है और स्पेशल पैकेज की मांग भी की है। अभी भी यहां के बहुत से लोग दूसरी जगह से कटे हुए हैं क्योंकि यहां टेलिफोन की भी सुविधा भी नहीं है। यहां अभी तक किसी कंपनी ने अपना टेलीफोन टावर तक नहीं लगाया।

यहां के निवासी जगत सिंह ने बताया कि यहां करीब 60-70 उपग्राम हैं जहां पानी की कमी है। इसलिए गांव के लोगों को छोटे पानी के टैंकरों पर पानी के लिए निर्भर रहना पड़ता है। सड़क न होने की वजह से गर्भवती महिलाओं को भी बैल गाड़ी से ले जाना पड़ता है। पिछले साल डीएनपी के अफसरों ने राज्य सरकार को इसके मद्देनजर एक प्रस्ताव भेजा था पर सरकार ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है। डीएनपी के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को सड़क,स्वास्थ बिजली,पानी जैसी 1,205 सुविधाओं की लिस्ट भेजी थी। इस प्रस्ताव को भेजे 6 साल हो चुके हैं पर अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी की 9 सदस्यों की टीम ने 2011 में अपनी रिपोर्ट दी थी। पूर्व वाइल्डलाइफ बोर्ड के चेयरमैन एमके रंजीत सिंह ने कहा कि रिपोर्ट देने के बाद भी राज्य और केंद्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। इस क्षेत्र के लोगों बिना किसी सुविधा के काफी बुरी स्थिति में रहने को मजबूर हैं।

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