राजिम कुंभ : नदियों के सरंक्षण के लिए होगा ‘नदी मैराथन’ का आयोजन

महानदी, पैरी और सोंढूर के संरक्षण और उनकी स्वच्छता के लिए तीन फरवरी को संकल्प के साथ होगी दौड़

राजिम कुंभ : नदियों के सरंक्षण के लिए होगा ‘नदी मैराथन’ का आयोजन

रायपुर : महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर माघ पूर्णिमा के दिन इस महीने की 31 तारीख से शुरू होने वाले राजिम कुंभ (कल्प) मेले को इस वर्ष नदियों के संरक्षण और उनकी स्वच्छता से भी जोड़ा गया है। इसके लिए नदी मैराथन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय नागरिकों सहित त्रिवेणी संगम के आसपास के गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को भी आमंत्रित किया गया है। इस मैराथन में सभी लोग तीनों नदियों के संरक्षण और उन्हें स्वच्छ रखने का संकल्प भी लेंगे।

उल्लेखनीय है कि एक पखवाड़े का राजिम कुंभ 31 जनवरी को माघ पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि के दिन 13 फरवरी तक चलेगा। इसकी तैयारी प्रगति पर है। राजिम कुंभ के दौरान तीन फरवरी को नदी मैराथन का भी आयोजन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए केन्द्रीय समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह समिति के संरक्षक हैं। जल संसाधन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित केन्द्रीय समिति में जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। बृजमोहन अग्रवाल ने सभी अधिकारियों को राजिम कुंभ-कल्प के सुचारू आयोजन के लिए परस्पर समन्वय से काम करने और तैयारियों को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

जल संसाधन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के सचिव सोनमणि बोरा ने आज यहां बताया कि राजिम कुंभ (कल्प) के दौरान सात फरवरी से विराट संत समागम की भी शुरूआत होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए देशभर से संत महात्माओं को भी आमंत्रित किया जा रहा है। धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग की ओर से सचिव बोरा ने छत्तीसगढ़ के सभी मंदिरों और धार्मिक न्यासों के अध्यक्षों, सचिवों, मुख्य पुजारियों, मंदिरों के व्यवस्थापकों, पुजारियों और सेवादारों, ट्रस्ट के न्यासियों को पत्र लिखकर संत समागम में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।

बोरा ने पत्र में लिखा है कि संत समागम में साधु-संतों और महात्माओं के शुभागमन के अवसर पर उनके स्वागत और सम्मान में भारतीय संस्कृति के अनुरूप शाम 5.30 बजे से 7.30 बजे तक गंगा आरती का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश की ढाई करोड़ से अधिक जनता की ओर से ढाई लाख से ज्यादा दीपक सामूहिक रूप से प्रज्ज्वलित करने का संकल्प लिया गया है। रतनपुर स्थित महामाया मंदिर समिति की ओर से गंगा आरती में 25 हजार दीये प्रदान करने की सहमति दी गई है। धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग ने अन्य मंदिर समितियों से भी अपनी-अपनी समितियों की ओर से गंगा आरती में दीये लेकर आने का अनुरोध किया गया है। बोरा ने पत्र में लिखा है कि 8 फरवरी को राजिम कुंभ में शाम 5.30 से 6 बजे के बीच सामूहिक शंखनाद का भी कार्यक्रम होगा, जिसमें 1500 से ज्यादा लोग शंखनाद करेंगे। गंगा आरती और शंखनाद के कार्यक्रमों में भी लोग नदियों के संरक्षण का संकल्प लेंगे।

बोरा ने धार्मिक न्यासों और मंदिर समितियों के अध्यक्षों, सचिवों, मुख्य पुजारियों, व्यवस्थापकों, पुजारियों, सेवादारों और न्यासियों से अपने पत्र में राजिम कुंभ (कल्प) में शामिल होने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि राजिम कुंभ मेले का यह तेरहवां वर्ष है। राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम होने के कारण छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से और विदेशों से भी लोग यहां आते हैं। इस वजह से यह मेला सांस्कृतिक दृष्टि और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण लोग समागम बन गया है।

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