छत्तीसगढ़

देशभर से आए साधु-संतों के सानिध्य में यादगार बना राजिम माघी पुन्नी मेला

- दीपक वर्मा

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मुख्य आतिथ्य में हुआ राजिम माघी पुन्नी मेला का समापन समारोह

राजिम। त्रिवेणी संगम के तट पर आयोजित राजिम माघी पुन्नी मेला का सोमवार को समापन हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल उपस्थित रहीं। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मस्व, पर्यटन व संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू की। समापन समारोह महामण्डलेश्वर शिवस्वरूपानंद जी महाराज जोधपुर, महंत रामसुन्दर जी महाराज राजिम, संत धर्मेन्द्र साहेब जी इलाहाबाद , स्वामी डॉ. गंगादास उदासीन जी महाराज हरिद्वार, महंत साध्वी प्रज्ञा भारती जी, रामबालक दास जी डौण्डीलोहारा तथा देशभर से आए साधू-संतों के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर विशेष रूप से महासमुन्द सांसद चन्दूलाल साहू, पूर्व विधायक लेखराम साहू, नगर पंचायत राजिम पवन सोनकर, अध्यक्ष जनपद पंचायत फिंगेश्वर जितेन्द्र साहू, मगरलोड श्रीमती निरूपा दाऊ एवं अध्यक्ष अभनपुर खेमराज कोसले आदि उपस्थित थे।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि आनंदी बेन पटेल ने कहा कि पवित्र नगरी राजिम में आकर अत्याधिक प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने राजिम पुन्नी मेले में आए देशभर के साधू संंतों का स्वागत करते हुए कहा कि इस आयोजन के लिए धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन स्वागत योग्य है। राजिम त्रिवेणी संगम है और इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। हमारे देश में राजिम मेला जैसे आयोजन होते हैं और ऐसे आयोजन से विभिन्न संस्कृतियों का संगम है। राजिम माघी पुन्नी मेला इसलिए विशेष है क्योंकि इस बार यहां पारंपरिक खेलों व कला को अलग से मंच दिया गया। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन बधाई की पात्र है। राजिम माघी पुन्नी मेला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। राज्यपाल ने मंच से नदियों के सरंक्षण व साफ सफाई को लेकर लोगों को जागरुक रहने का संदेश दिया। अंत में उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम को साफ सुथरा और प्रदूषण मुक्त करें।

इससे पहले मंच पर स्वागत उद्बोधन धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने दिया। उन्होंने राजिम माघी पुन्नी मेला के सफल आयोजन के लिए विभागीय अधिकारियों को साधुवाद दिया। उन्होंने महानदी आरती का जिक्र करते हुए साध्वी प्रज्ञा भारती व वेद रत्न सेवा प्रकल्प के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बनने के बाद पहली बार हमने राजिम माघी पुन्नी मेला का आयोजन किया है। हम बार बार कहरहे हैं कि यह हमारा पहला आयोजन है और कोई कमी हो तो उसके लिए सरकार की ओर से माफी मांगता हूं। अगली बार इसे और बेहतर बनाया जाएगा। इस साल हमने काफी कुछ नया किया है। हमने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक दिखाने के लिए लोक खेलों का आयोजन किया। कबड्डी, खो-खो, गिल्ली डंडा और गेड़ी जैसे खेलों की प्रतियोगिता कराई। साथ ही पारंपरिक खेलों का आयोजन कर छत्तीसगढ़ी संस्कृति को सामने लाने का प्रयास किया है। हमने लोक कला को बढ़ावा देने के लिए अलग से मंच बनवाया जहां से प्रदेश भर के अनेक विधाओं का प्रदर्शन हुआ।

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