राजिम त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं की भीड़, रेत का शिवलिंग बनाकर की पूजा

शाम को महानदी में होगा दीपदान

गरियाबन्द :

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में नदी किनारे रेत का शिवलिंग बनाकर उसी पूजा करने के साथ त्रिवेणी संगम के बींचोबीच स्थित भगवान कुलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना कर रहे हैं.

हिन्दू धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि आज के दिन यदि कोई नदी में स्नान करने के बाद भगवान शिव की आराधना करता है, तो भगवान शिव उनकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं.

यही कारण है कि हिन्दू धर्म मे कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदियों में स्नान करने और भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है.

राजिम त्रिवेणी छतीसगढ़ का प्रयागराज

धर्म नगरी राजिम को छतीसगढ़ का प्रयागराज कहा जाता है. प्रयाग की तरह यहाँ भी तीन नदियों – महानदी, पैरी और सौंढूर का संगम होता है. तीनों ही नदियों को पवित्र माना जाता है.

यही कारण है कि प्रयाग की तरह यहां ना केवल कुंभ लगता है, बल्कि कार्तिक पूर्णिमा पर्व भी बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर पूरे छतीसगढ़ से श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं, विधि-विधान से त्रिवेणी में स्नान करने के बाद त्रिवेणी संगम के बीचोबीच स्थित भगवान कुलेश्वरनाथ मन्दिर में पूजा-अर्चना करते हैं.

मड़ई मेला का होगा आयोजन

त्रिवेणी संगम में शाम को मड़ई मेला का आयोजन होगा, जिसमें आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं. छतीसगढ़ में मड़ई मेला की एक अलग पहचान है, सभी गांव में मड़ई मेलो का आयोजन होता है.

पिछले कुछ सालों से राजिम त्रिवेणी संगम प्रदूषित होता जा रहा है, इसको रोकने के लिए महानदी बचाओ समिति का गठन किया गया है. समिति की ओर से इस बार लोगों को महानदी के प्रति जागरूक करने के लिए दीपदान का कार्यक्रम रखा है, जो शुक्रवार शाम को त्रिवेणी संगम तट पर आयोजित होगा.

राजिम क्षेत्र में पहली मड़ई भगवान कुलेश्वरनाथ के समक्ष होती है, उसके बाद ही इलाके के गांवों में मड़ई मेलों की शुरुवात होती है. समिति के पदाधिकारियों को कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद जताई है.

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